September 4, 2026

महासमुंद में रोटावायरस वैक्सीन का संकट, 2-3 महीने से सरकारी अस्पतालों में स्टॉक खत्म

पिथौरा। महासमुंद जिले में छोटे बच्चों को दी जाने वाली रोटावायरस वैक्सीन की लंबे समय से कमी बनी हुई है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले दो से तीन महीनों से वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। राज्य स्तर से आपूर्ति रुकने के कारण स्वास्थ्य केंद्रों का स्टॉक खत्म हो गया है, जिससे बच्चों के टीकाकरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सालाना 15 हजार डोज की जरूरत

पिथौरा स्वास्थ्य विभाग में सालाना करीब 3,700 डोज रोटावायरस वैक्सीन की खपत होती है। वहीं पूरे महासमुंद जिले में हर साल लगभग 15 हजार डोज की जरूरत पड़ती है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी नागेश्वर राव के मुताबिक, पिथौरा में करीब दो महीने से स्टॉक उपलब्ध नहीं है और इसकी सप्लाई राज्य स्तर से होती है।

शिशुओं को तीन बार दी जाती है वैक्सीन

रोटावायरस वैक्सीन शिशुओं को करीब डेढ़ माह, दो माह और साढ़े तीन माह की उम्र में तीन बार ड्रॉप के रूप में दी जाती है। यह बच्चों को गंभीर दस्त, उल्टी और रोटावायरस संक्रमण से बचाने में मदद करती है। समय पर टीकाकरण होने से डिहाइड्रेशन और संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम भी कम होता है।

सरकारी वैक्सीन नहीं मिलने से परिवार परेशान

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने से कई परिवार निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का रुख कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवारों के लिए निजी अस्पतालों में टीकाकरण का खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक वैक्सीन की कमी बच्चों के नियमित टीकाकरण पर असर डाल सकती है।

जल्द आपूर्ति की मांग

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों ने जिले में रोटावायरस वैक्सीन की जल्द से जल्द आपूर्ति सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है, ताकि बच्चों को निर्धारित समय पर टीका मिल सके। वहीं अभिभावकों से टीकाकरण कार्यक्रम नियमित रखने और वैक्सीन उपलब्धता को लेकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से जानकारी लेने की अपील की गई है।