रायपुर/गरियाबंद। महाशिवरात्रि का पावन पर्व आज पूरे प्रदेश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से शिवालयों में भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। इसी बीच गरियाबंद जिले के प्रसिद्ध भुतेश्वरनाथ मंदिर में भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जहां प्रकृति प्रदत्त विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग विराजमान है।
बढ़ता हुआ शिवलिंग: आस्था या चमत्कार?
भूतेश्वर नाथ महादेव के नाम से प्रसिद्ध इस प्राकृतिक शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका आकार हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। भक्तों की मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव इस पावन धरा पर शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।
वर्तमान में इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 18 फीट और गोलाई करीब 20 फीट बताई जाती है।
विज्ञान के लिए रहस्य, भक्तों के लिए आस्था
पुरातत्व विभाग द्वारा प्रतिवर्ष इस शिवलिंग का मापन और परीक्षण किया जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, शिवलिंग हर साल लगभग 6 से 8 इंच तक बढ़ता है।
जहां श्रद्धालु इसे चमत्कार मानते हैं, वहीं वैज्ञानिकों के लिए यह आज भी शोध का विषय बना हुआ है।
‘भकुर्रा महादेव’ नाम की मान्यता
भूतेश्वर नाथ महादेव को ‘भकुर्रा महादेव’ के नाम से भी जाना जाता है। छत्तीसगढ़ी भाषा में हुंकार या तेज आवाज को ‘भकुर्रा’ कहा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां से पूर्व में रहस्यमयी ध्वनियां सुनाई देती थीं, जिसके कारण यह नाम प्रचलित हुआ।
अर्धनारीश्वर रूप में होती है पूजा
शिवलिंग में हल्की दरार होने के कारण इसे अर्धनारीश्वर स्वरूप में पूजा जाता है। शिवलिंग के पीछे भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की प्रतिमा स्थापित है।
भक्तों के अनुसार, यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है और यहां दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
उत्पत्ति से जुड़ी प्राचीन कथा
स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, जमींदारी प्रथा के समय गरियाबंद के पारागांव निवासी शोभा सिंह नामक जमींदार यहां खेती करते थे। शाम के समय खेत के पास बैल की आवाज और शेर की दहाड़ जैसी रहस्यमयी ध्वनियां सुनाई देती थीं। ग्रामीणों ने जब जांच की तो कोई जानवर नहीं मिला। इसके बाद उस स्थान को दिव्य मानकर पूजा शुरू कर दी गई और समय के साथ यह स्थान भव्य धाम के रूप में विकसित हो गया।





