रायपुर।
पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड की सिविल लाइन स्थित जमीनों की खरीद–बिक्री से जुड़े मामले में राजस्व मंडल ने अहम आदेश पारित किया है। मंडल ने अगले एक महीने तक संबंधित भूमि और उससे जुड़े सभी राजस्व अभिलेखों को यथावत रखने के निर्देश दिए हैं। इससे फिलहाल जमीन की बिक्री, हस्तांतरण या रिकॉर्ड में किसी भी तरह के बदलाव पर रोक लग गई है।
इस मामले में आवेदक नारायण लाल शर्मा ने राजस्व मंडल में याचिका दायर कर पूर्व सीएस विवेक ढांड और उनके परिवार द्वारा सिविल लाइन क्षेत्र की नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है। प्रकरण की सुनवाई अभी राजस्व मंडल में जारी है।
1964 में मिला था आवासीय पट्टा
आवेदक की शिकायत के अनुसार, सिविल लाइन के मुख्य मार्ग पर स्थित करीब 1 लाख 53 हजार वर्ग फीट नजूल भूमि वर्ष 1964 में ढांड परिवार को आवासीय पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। इसकी रजिस्ट्री लगभग 1 लाख 23 हजार रुपये में होना बताया गया है।
याचिका में कहा गया है कि उक्त भूमि को बाद में अलग–अलग हिस्सों में विभाजित कर 58 हजार, 37 हजार, 23 हजार वर्ग फीट सहित अन्य भाग ढांड परिवार के सदस्यों के नाम हस्तांतरित किए गए, जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।
व्यावसायिक उपयोग का आरोप
आवेदक का आरोप है कि आवासीय पट्टे पर दी गई नजूल भूमि का उपयोग केवल आवासीय प्रयोजन के लिए किया जा सकता है, जबकि पूर्व सीएस द्वारा उसका व्यावसायिक उपयोग किया गया। साथ ही पिछली भूपेश सरकार की फ्रीहोल्ड नीति का लाभ उठाकर जमीन को फ्रीहोल्ड कराया गया, जिसमें गंभीर अनियमितताएं होने का दावा किया गया है।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार की फ्रीहोल्ड नीति को निरस्त कर दिया है और उससे जुड़े मामलों की जांच चल रही है। इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि ढांड परिवार जमीन बेचने की तैयारी में है, इसलिए तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।
राजस्व मंडल का सख्त रुख
मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद राजस्व मंडल अध्यक्ष ने जमीन और उससे जुड़े सभी राजस्व अभिलेखों को यथास्थिति में रखने का आदेश दिया है। इससे साफ है कि अगली सुनवाई तक जमीन पर कोई लेन-देन या रिकॉर्ड में बदलाव नहीं हो सकेगा।
अब इस हाई-प्रोफाइल जमीन मामले पर सबकी नजरें राजस्व मंडल के अगले फैसले पर टिकी हैं।





