May 15, 2026

मल्हार में 2000 साल पुराना ताम्रपत्र मिला, ब्राह्मी लिपि में ऐतिहासिक लेख

बिलासपुर। मल्हार में ज्ञान भारतम अभियान के तहत एक दुर्लभ ताम्रपत्र की खोज हुई है। संजीव पाण्डेय के निवास से मिले इस ताम्रपत्र का वजन 3 किलोग्राम से अधिक बताया जा रहा है, जिस पर लगभग 2000 वर्ष पुरानी ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लेख उत्कीर्ण हैं। इसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार ब्राह्मी लिपि भारत की प्राचीनतम लिपियों में से एक है, जिसका उपयोग मौर्य काल से कई शताब्दियों तक होता रहा। वहीं पाली भाषा का संबंध बौद्ध धर्म के साहित्य और शिक्षाओं से जुड़ा है, जिससे इस खोज का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है।

प्राचीन समय में ऐसे ताम्रपत्रों का उपयोग भूमि दान, राजकीय आदेश और धार्मिक घोषणाओं के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में किया जाता था। इस ताम्रपत्र के वैज्ञानिक परीक्षण और अध्ययन से उस काल की सामाजिक, प्रशासनिक और धार्मिक व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।

संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में चल रहे ज्ञान भारतम् अभियान के तहत यह खोज मल्हार की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को उजागर करती है। अभियान का उद्देश्य देश की प्राचीन पांडुलिपियों और दस्तावेजों का संरक्षण, पहचान और डिजिटलीकरण करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।