दंतेवाड़ा।
बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम दर्ज हुआ है। दंतेवाड़ा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत 36 इनामी माओवादियों सहित कुल 63 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं।
यह घटनाक्रम न केवल सुरक्षा मोर्चे पर बड़ी सफलता है, बल्कि बस्तर के भविष्य के लिए निर्णायक परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही समाधान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है।
उन्होंने कहा—
“यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि बंदूक नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और विकास ही स्थायी समाधान हैं।”
नक्सलवाद अंतिम चरण में, बस्तर में पहुंच रहा विकास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का प्रभावी विघटन हो रहा है।
उन्होंने बताया कि बस्तर के सुदूर अंचलों में अब तेजी से—
- सड़क
- बिजली
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- रोजगार
- डिजिटल कनेक्टिविटी
जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
आत्मसमर्पित माओवादियों को मिलेगा सम्मानजनक पुनर्वास
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका के अवसर और सामाजिक पुनर्स्थापन की पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें।
भय से भविष्य की ओर बढ़ता बस्तर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर अब भय की नहीं, बल्कि भविष्य की भूमि बन रहा है—जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं।





