May 18, 2026

मीराबाई चानू का बड़ा सपना अब भी अधूरा, एशियन गेम्स पदक को बताया प्राथमिकता

रायपुर। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सेखोम मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के उद्घाटन अवसर पर अपने करियर के सबसे बड़े अधूरे लक्ष्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स में पदक जीतना अब भी उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पिछले एक दशक से भारतीय वेटलिफ्टिंग की अग्रणी खिलाड़ी रहीं मीराबाई ने ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में कई पदक जीते हैं, लेकिन एशियाई खेलों में अब तक उन्हें सफलता नहीं मिल सकी है।

उन्होंने 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में 19 वर्ष की उम्र में पदार्पण किया था, जहां वे नौवें स्थान पर रहीं। इसके बाद 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में पीठ की चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकीं, जबकि 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में हिप इंजरी के चलते उनका सपना अधूरा रह गया।

31 वर्षीय मीराबाई ने कहा कि एशियन गेम्स उनके लिए बेहद खास है, क्योंकि वहां प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा होता है। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि वे इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पदक जीतें।

हालांकि, इस लक्ष्य की राह आसान नहीं है। नियमों में बदलाव के कारण उन्हें 48 और 49 किलोग्राम वर्ग के बीच संतुलन बनाना होगा। वे 23 जुलाई से 2 अगस्त तक ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लेंगी, जबकि 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक नागोया (जापान) में आयोजित एशियन गेम्स में 49 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी।

हाल ही में मीराबाई ने राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 48 किलोग्राम वर्ग में तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए। उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 205 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया।

इस मौके पर उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच साबित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

मीराबाई ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और साई ट्रेनिंग सेंटर की भी तारीफ की। उनके अनुसार, इन संस्थानों में खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।