बिलासपुर। दुर्ग जिले की एक सहकारी समिति में 690.70 क्विंटल धान और हजारों बारदाने की कमी के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कराने पहुंचे सोसायटी प्रबंधक को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की खंडपीठ में हुई।
याचिकाकर्ता अतुल वर्मा सेवा सहकारी समिति मर्यादित कुम्हली, तहसील पाटन (दुर्ग) में सोसायटी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। उनके खिलाफ सहकारी केंद्रीय बैंक लिमिटेड दुर्ग की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
जांच में धान और बारदाने की बड़ी कमी मिली
बिलासपुर। शिकायत के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान समिति में 53,956.40 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। 23 अप्रैल 2026 को खाद्य एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन किया, जिसमें 690.70 क्विंटल धान और 3,057 बारदानों की कमी पाई गई।
जांच रिपोर्ट में गायब धान की कीमत 21.41 लाख रुपये और बारदानों की कीमत 2.13 लाख रुपये आंकी गई। कुल मिलाकर 23.54 लाख रुपये की शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया।
चूहे, कीड़े और सूखेपन का दिया तर्क
बिलासपुर। एफआईआर को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में कहा कि धान की कमी मौसम, सूखत, चूहों और कीड़ों के कारण हुई है। उनका तर्क था कि ऐसी परिस्थितियों को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं था, इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए।
हाईकोर्ट ने दलीलें खारिज कर याचिका की नामंजूर
बिलासपुर। मामले में याचिकाकर्ता और राज्य शासन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए मामले की जांच जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सोसायटी प्रबंधक को मामले की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।





