July 23, 2026

CG News: जल जीवन मिशन फेल! दो साल से अधूरी योजना, नदी के झरिया का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

मोहला-मानपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावों के बीच मोहला-मानपुर जिले के मानपुर विकासखंड का पिट्टेमेटा गांव बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है। यहां करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया पानी टंकी टावर पिछले करीब दो वर्षों से बेकार खड़ा है, जबकि ग्रामीण आज भी बारिश के मौसम में नदी में झरिया (छोटा जलस्रोत) बनाकर पीने का पानी जुटाने को मजबूर हैं।

महाराष्ट्र सीमा से लगे और कभी नक्सल प्रभावित रहे इस गांव में सुरक्षा व्यवस्था तो बेहतर हुई, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का संकट अब भी कायम है। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत गांव में पानी की टंकी और पाइपलाइन का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन योजना अधूरी छोड़ दी गई। न तो सभी घरों तक पाइपलाइन पहुंच सकी और न ही नियमित जलापूर्ति शुरू हो पाई।

शुरुआती दिनों में टंकी के नीचे लगे पाइप से ग्रामीणों को कुछ हद तक पानी मिल जाता था, लेकिन बाद में गांव में बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह से लीकेज हो गई। इसके चलते टंकी तक पानी पहुंचना बंद हो गया और पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई। आज हालात यह हैं कि विशाल पानी टंकी केवल शोपीस बनकर रह गई है।

गांव में पहले से मौजूद सोलर सिस्टम आधारित छोटी पेयजल योजना भी ग्रामीणों की जरूरत पूरी नहीं कर पा रही है। टंकी में पर्याप्त पानी संग्रहित नहीं हो पाता और उससे जुड़े नलों में केवल बूंद-बूंद पानी आता है। जिस हैंडपंप से यह व्यवस्था संचालित होती है, वह भी खराब होकर लीकेज की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को घंटों इंतजार करने के बाद भी मुश्किल से थोड़ा पानी मिल पाता है।

पानी की किल्लत के चलते ग्रामीणों ने पास की नदी का सहारा ले रखा है। बरसात के दौरान नदी में झरिया बनाकर वहीं से पानी निकालकर पीने और घरेलू उपयोग के लिए ले जाना उनकी मजबूरी बन गई है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी लगातार बना हुआ है।

गांव के ग्राम पटेल सहित ग्रामीण लगातार शासन-प्रशासन से पेयजल संकट दूर करने और अधूरी जल जीवन मिशन योजना को जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, संबंधित विभाग के अधिकारी जल्द कार्रवाई और व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दे रहे हैं। हालांकि फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है और पिट्टेमेटा के ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं।