July 31, 2026

करंट से युवक की मौत के बाद फूटा गुस्सा, अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने का आरोप; NH पर चक्काजाम

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में करंट लगने से एक युवक की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना के विरोध में मृतक के परिजनों, स्थानीय नागरिकों और भाजपा नेता वेदप्रकाश के नेतृत्व में लोगों ने जरहागांव बस स्टैंड पर नेशनल हाईवे पर करीब आधे घंटे तक चक्काजाम कर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई, पर्याप्त डॉक्टरों की नियुक्ति और मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग की।

जानकारी के अनुसार, नगर निवासी गोविंद साहू उर्फ गोलू को देर रात बिजली का करंट लग गया। परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए जरहागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि उस समय अस्पताल में ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्राथमिक उपचार देने के बजाय अस्पताल स्टाफ ने युवक को सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

गंभीर हालत में परिजन गोविंद साहू को जिला अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। उनका आरोप है कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध होते और तत्काल इलाज मिलता तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।

आक्रोशित लोगों ने देर रात जरहागांव बस स्टैंड पर नेशनल हाईवे जाम कर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित रहा।

प्रदर्शनकारियों ने घटना के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टरों की तैनाती तथा मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई और उनकी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और यातायात बहाल हो सका।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। बीएमओ डॉ. कमलेश खैरवार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और उपचार में लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।