मुंगेली। बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने की आशंका को देखते हुए जिले के ग्राम दाऊकापा के सांवरा मोहल्ले में विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव, प्राथमिक सावधानियों और समय पर उपचार के महत्व की जानकारी दी गई।
झाड़-फूंक में समय गंवाने से बचें
डॉ. मनीष बंजारा ने बताया कि देश में हर साल बड़ी संख्या में लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं और कई लोगों की मौत भी हो जाती है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी और समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से कई जानें बचाई जा सकती हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों में सर्पदंश को लेकर व्याप्त भय, भ्रम और अंधविश्वास को दूर कर वैज्ञानिक एवं जीवनरक्षक जानकारी उपलब्ध कराना था। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या घरेलू उपचार में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है।
विषैले और विषहीन सांपों की दी जानकारी
ग्रामीणों को कोबरा, करैत, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे प्रमुख विषैले सांपों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि केवल सांप की पहचान के आधार पर दंश को विषैला या विषहीन मानना उचित नहीं है। इसलिए सर्पदंश के हर मामले में चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
सांप को पकड़ने या मारने के प्रयास में समय गंवाने के बजाय मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण है। संभव हो तो सुरक्षित दूरी से सांप की फोटो लेकर चिकित्सक को दिखाई जा सकती है।
सर्पदंश होने पर क्या करें
सर्पदंश के बाद मरीज को शांत रखें और अनावश्यक चलने-फिरने से रोकें। प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें तथा अंगूठी, चूड़ी, कड़ा, जूते या अन्य कसने वाली वस्तुएं हटा दें। इसके बाद बिना देरी किए मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य संस्था ले जाएं।
इन चीजों से बचें
सर्पदंश के बाद घाव को काटना या चीरना, मुंह से जहर चूसना, कसकर रस्सी बांधना, घाव को जलाना, जड़ी-बूटी या रसायन लगाना और झाड़-फूंक में समय गंवाना नहीं चाहिए। ये उपाय मरीज के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
गंभीर लक्षणों पर तत्काल उपचार जरूरी
डॉ. बंजारा ने बताया कि कोबरा और करैत जैसे न्यूरोटॉक्सिक सर्पदंश में पलक गिरना, बोलने या निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर के दंश में रक्तस्राव, पेशाब में खून और गंभीर स्थिति में किडनी को नुकसान जैसी समस्या हो सकती है।
समय पर उचित चिकित्सा उपचार और आवश्यक होने पर एंटी-स्नेक वेनम दिए जाने से गंभीर स्थिति में मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है।
सांप पर्यावरण के प्रहरी
कार्यक्रम में बताया गया कि सांप पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे चूहों और अन्य जीवों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसलिए सांपों के प्रति अनावश्यक भय और नफरत के बजाय सावधानी, समझ और संरक्षण की भावना विकसित करना जरूरी है।
ग्रामीणों को रात में टॉर्च का उपयोग करने, घर के आसपास साफ-सफाई रखने, सोते समय सावधानी बरतने, जमीन पर सोने से बचने और बरसात के मौसम में विशेष सतर्कता रखने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सर्पदंश से जुड़े सवाल पूछे, जिनका चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक तरीके से समाधान बताया गया।





