रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी जमीन विवाद को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस की जांच समिति ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया कि सभी सरकारी दस्तावेज ग्रामीणों के पक्ष में होने के बावजूद छुट्टी के दिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बस्ती को हटाया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि कहीं इस कार्रवाई का मकसद नवा रायपुर क्षेत्र की जमीन भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाना तो नहीं है।
पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने प्रेसवार्ता में वर्ष 2024 में आवास सचिव द्वारा रायपुर कलेक्टर को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित खसरा नंबरों की भूमि पर पहले से कच्चे और पक्के मकान बने हुए हैं। पत्र में अतिक्रमण हटाकर भूमि उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जबकि हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि बोर्ड ने ऐसी कोई जमीन नहीं मांगी। कांग्रेस का कहना है कि दोनों बयानों में स्पष्ट विरोधाभास है।
धनेंद्र साहू ने दावा किया कि खसरा नंबर 407, 477 और 524 की लगभग 24 हेक्टेयर भूमि आज भी राजस्व रिकॉर्ड में ‘सम्लित चारागाह’ के रूप में दर्ज है। वहीं खसरा नंबर 698, 700 और 701 की करीब 3 हेक्टेयर भूमि एनआरडीए के नाम दर्ज है। उनका कहना है कि ग्रामीणों की बसाहट भी इसी क्षेत्र में है और उन्हें प्रधानमंत्री आवास, नल-जल योजना, सड़क और बिजली जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
कांग्रेस नेता ने 1930-31 की चकबंदी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस समय के राजस्व रिकॉर्ड में कई ग्रामीण भू-स्वामी के रूप में दर्ज हैं और वर्षों से लगान भी जमा किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी भूमि का अधिग्रहण केवल कानूनी प्रक्रिया और ग्राम सभा की सहमति से ही किया जा सकता है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नकटी गांव के आसपास भाजपा नेताओं के कब्जे वाली जमीनों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पार्टी ने पूरे क्षेत्र की जमीन का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि किन-किन लोगों के पास जमीन है।
कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने गरीब ग्रामीणों के साथ अन्याय किया है और पार्टी इस मामले में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।





