रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में राज्यपाल Ramen Deka मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने की।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि आम केवल एक फल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आम उत्पादन और उससे जुड़े वैल्यू एडिशन पर काम करने की अपील की।
राज्यपाल ने कहा कि भारत विश्व में आम उत्पादन में अग्रणी देश है और यहां एक हजार से अधिक किस्मों के आम पाए जाते हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्थानीय आमों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के किसान उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन से अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आम महोत्सव जैसे आयोजन किसानों को नई तकनीकों, उन्नत खेती पद्धतियों और नवाचारों की जानकारी देने का बड़ा मंच हैं। बस्तर, कोंडागांव, कांकेर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के अवसर मौजूद हैं।
राज्यपाल ने मैंगो टूरिज्म की संभावनाओं पर भी जोर देते हुए कहा कि आम उत्पादन के साथ इसके वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय और छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को इस दिशा में मिलकर काम करने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आम फलों का राजा है और भारतीय जीवन में इसका विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि महोत्सव में आम की 250 से अधिक किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी में बेर के आकार से लेकर बीजापुर के हाथीझुल जैसे बड़े आकार के आम भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की मंशा के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और आम की खेती इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उद्घाटन के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने आम उत्पादकों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और विभिन्न किस्मों की जानकारी ली। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष Chandrahas Chandrakar, कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष Suresh Chandravanshi, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति Dr. Girish Chandel सहित बड़ी संख्या में किसान, शिक्षाविद और आम उत्पादक मौजूद रहे।





