July 23, 2026

नव्या मलिक MDMA ड्रग्स केस: SIT करेगी हाईप्रोफाइल नेटवर्क की जांच, मनी ट्रेल से पार्टियों तक होगी पड़ताल

रायपुर। चर्चित नव्या मलिक एमडीएमए ड्रग्स केस की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दी गई है। मामले की गंभीरता और इसके संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क को देखते हुए पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। टीम में एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), क्राइम ब्रांच प्रभारी, गंज थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। एसआईटी अब ड्रग सिंडिकेट, सप्लाई चेन, मनी ट्रेल और पूरे आपराधिक नेटवर्क की गहराई से जांच करेगी।

कैसे सामने आया था मामला?

यह मामला 23 अगस्त 2025 को सामने आया था, जब एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के पास एक कार से 27.58 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स बरामद की थी। कार्रवाई में हर्ष आहूजा, मोनू बिश्नोई और दीप धनोरिया को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कार, नकदी और मोबाइल फोन भी जब्त किए थे।

पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने मुंबई से नव्या मलिक को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोप लगा कि वह रायपुर की हाईप्रोफाइल पार्टियों, निजी आयोजनों और नाइट क्लबों में एमडीएमए की सप्लाई करती थी।

चार्जशीट में हुए अहम खुलासे

पुलिस की चार्जशीट के अनुसार ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि मोनू बिश्नोई के माध्यम से कई लोगों तक एमडीएमए पहुंचाई गई। चार्जशीट में कुछ लोगों को ड्रग्स सप्लाई किए जाने और लेन-देन से जुड़े भुगतान के उल्लेख भी किए गए हैं।

दो चरणों में होगी जांच

एसआईटी जांच को दो चरणों में आगे बढ़ाएगी।

पहले चरण में एमडीएमए के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क, मनी ट्रेल, हाईप्रोफाइल पार्टियों से कनेक्शन और प्रमुख आरोपियों की भूमिका की जांच की जाएगी।

दूसरे चरण में अंतरराज्यीय नेटवर्क, संरक्षण और मिलीभगत, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण तथा ड्रग्स खरीदने वाले उपभोक्ताओं की पहचान पर फोकस रहेगा।

इन बिंदुओं पर रहेगा एसआईटी का फोकस

  • एमडीएमए ड्रग्स का मूल स्रोत और मुख्य सप्लायर कौन है।
  • रायपुर, मुंबई और अन्य राज्यों से जुड़े पूरे सप्लाई नेटवर्क की पहचान।
  • नव्या मलिक और अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल।
  • बैंक खाते, यूपीआई, नकद लेन-देन और अवैध कमाई की जांच।
  • मोबाइल, लैपटॉप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का फॉरेंसिक विश्लेषण।
  • निजी पार्टियों, क्लबों, पब और कथित टेक्नो पार्टियों में ड्रग्स सप्लाई की जांच।
  • ड्रग्स खरीदने वाले उपभोक्ताओं और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान।
  • पुराने एनडीपीएस मामलों और अन्य राज्यों से जुड़े संभावित संबंधों की पड़ताल।
  • किसी प्रभावशाली व्यक्ति, कारोबारी या अन्य लोगों द्वारा संरक्षण अथवा आर्थिक मदद की जांच।

ईडी भी कर रही अलग जांच

मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कथित अवैध कमाई और मनी ट्रेल की अलग से जांच कर रहा है। ऐसे में यह केस अब सिर्फ ड्रग्स बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठित अपराध और आर्थिक अपराध के पहलुओं की भी व्यापक जांच का विषय बन चुका है।