May 19, 2026

रायपुर से ‘नक्सलवाद मुक्त’ भारत का ऐलान, 31 मार्च 2026 बना ऐतिहासिक दिन

रायपुर। 31 मार्च 2026 की तारीख देश के इतिहास में नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी जीत के रूप में दर्ज हो गई है। वर्षों से हिंसा और भय के साए में रहे बस्तर में अब शांति और विकास की नई शुरुआत मानी जा रही है।

‘असंभव’ लक्ष्य हुआ हासिल
करीब दो साल पहले जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया था, तब इसे कई लोगों ने अवास्तविक बताया था। लेकिन अब तय समयसीमा के भीतर इस लक्ष्य को हासिल करने का दावा किया जा रहा है।

संसद में बड़ा दावा
अमित शाह ने संसद में घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ समेत देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय सीएपीएफ, कोबरा, राज्य पुलिस, डीआरजी के जवानों और स्थानीय आदिवासियों को दिया।

आंकड़ों में ‘ऑपरेशन’ की कहानी

  • पिछले 3 साल में 706 नक्सली मारे गए
  • 4800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
  • देश में अब केवल 2 जिले नक्सल प्रभावित बचे
  • करीब 2000 नक्सली गिरफ्तार
  • 3000 से ज्यादा नक्सली मुख्यधारा में शामिल

केंद्र-राज्य की संयुक्त रणनीति
प्रदेश में सरकार बनने के बाद केंद्र और राज्य ने मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रणनीति बनाई। इस दौरान अमित शाह लगातार छत्तीसगढ़ का दौरा कर समीक्षा करते रहे। वहीं गृह मंत्री स्तर पर विजय शर्मा ने जमीनी स्तर पर अभियान को आगे बढ़ाया।

बस्तर में बदली तस्वीर
कभी नक्सल हिंसा का गढ़ रहे बस्तर में अब विकास, संवाद और पुनर्वास की नीति पर काम किया गया। नक्सलियों के परिजनों से संपर्क, आत्मसमर्पण नीति और सुरक्षा अभियानों के संयोजन ने हालात बदलने में अहम भूमिका निभाई।

नक्सलबाड़ी से बस्तर तक का सफर
नक्सलबाड़ी आंदोलन से शुरू हुई यह समस्या धीरे-धीरे बस्तर के घने जंगलों तक फैल गई थी। दशकों तक चली इस हिंसा ने हजारों लोगों की जान ली और क्षेत्र के विकास को बाधित किया।

बलिदान की लंबी कहानी

  • 1987 से 2026 तक 1416 जवान शहीद
  • 1277 आईईडी ब्लास्ट
  • 443 जवान शहीद, 915 घायल
  • 4580 आईईडी बरामद

‘अमिट विजय’ की ओर देश
हालांकि इस सफलता के पीछे सुरक्षा बलों का लंबा संघर्ष और बलिदान रहा है। अब 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक “अमिट विजय” के रूप में देखा जा रहा है, जिसने बस्तर सहित पूरे देश में शांति और विकास की नई उम्मीद जगाई है।