January 16, 2026

धान खरीदी में छत्तीसगढ़ ने बनाया नया रिकॉर्ड, 13 जनवरी तक 105.14 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में चल रहे धान खरीदी महाअभियान ने इस वर्ष ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 13 जनवरी 2026 तक खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने 17,77,419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन (LMT) धान की खरीदी की है। इसके एवज में किसानों को ₹23,448 करोड़ की रिकॉर्ड राशि का भुगतान किया गया है। यह 13 जनवरी तक की अवधि में अब तक की सबसे अधिक खरीदी और सर्वाधिक भुगतान है।

पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी छलांग

आंकड़ों के अनुसार,

  • 2020-21 में 13 जनवरी तक 72.15 LMT धान की खरीदी और ₹13,550 करोड़ का भुगतान हुआ था।
  • 2021-22 में 68.77 LMT धान की खरीदी के बदले ₹13,410 करोड़ का भुगतान किया गया।
  • 2022-23 में 97.67 LMT धान खरीदा गया और ₹20,022 करोड़ किसानों को मिले।

इन सभी वर्षों की तुलना में 2025-26 में सिर्फ 13 जनवरी तक ही 105.14 LMT धान की खरीदी कर ली गई है, जो अपने-आप में नया रिकॉर्ड है।

किसानों के भरोसे को मिला बल

सरकार का कहना है कि पारदर्शी खरीदी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान प्रणाली और किसान-हितैषी नीतियों के कारण किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है। समय पर भुगतान मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली है।

अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई

राज्य सरकार ने धान भंडारण में सूखत और अनियमितताओं पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई है।

  • 0.5% से 1% तक कमी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस
  • 1% से 2% तक कमी पर विभागीय जांच
  • 2% से अधिक कमी पर निलंबन और आपराधिक कार्रवाई

विगत दो वर्षों में 33 खाद्य निरीक्षकों और अधिकारियों को नोटिस, 2 मामलों में एफआईआर और 1 संग्रहण केन्द्र प्रभारी को निलंबित किया गया है।

केंद्रीय लक्ष्य और धान निराकरण

भारत सरकार द्वारा केंद्रीय पूल के तहत 78 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध लगभग 116 लाख मीट्रिक टन धान का निराकरण संभव हुआ। शेष धान का निराकरण नीलामी के माध्यम से किया गया। एफसीआई गोदामों की सीमित क्षमता के कारण अंतिम निराकरण में 12 से 15 माह का समय लगने से सूखत की संभावना बनी रही।

सरकार का स्पष्ट संदेश

राज्य सरकार ने दोहराया है कि किसानों के धन, अनाज और विश्वास से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। धान खरीदी, भुगतान, भंडारण और निराकरण की पूरी प्रक्रिया को तकनीकी निगरानी, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही के साथ संचालित किया जा रहा है।