रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में उन्हें जमानत दे दी। हालांकि अदालत ने शर्त रखी है कि वे छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे और केवल सुनवाई या जांच में शामिल होने के लिए ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।
निरंजन दास पिछले करीब दो वर्षों से जेल में बंद थे। उन पर कथित शराब सिंडिकेट, अवैध कमीशनखोरी और आबकारी नीति में हेरफेर कर करोड़ों रुपये के घोटाले में भूमिका निभाने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार यह कथित घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मुख्य मामले से जुड़े दो अलग-अलग मामलों और संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में सुनवाई करते हुए निरंजन दास को राहत प्रदान की। इससे पहले इस मामले में आरोपी अनिल टुटेजा और एपी त्रिपाठी को भी जमानत मिल चुकी है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निरंजन दास को कथित तौर पर इस पूरे मामले का प्रमुख सूत्रधार बताया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने राज्य की आबकारी नीति तैयार करने में ऐसी भूमिका निभाई, जिससे अन्य सह-आरोपियों को लाभ पहुंचाया जा सके।
अदालत ने बताया कि निरंजन दास को दो अलग-अलग मामलों में 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने वही जमानत शर्तें लागू की हैं, जो अन्य सह-आरोपियों पर लागू हैं। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में वे जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को भी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दी थी।
क्या है शराब घोटाला मामला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप है।
ED की जांच में दावा किया गया कि तत्कालीन सरकार के दौरान कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध उगाही और शराब बिक्री में हेरफेर किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, घोटाले को तीन हिस्सों — A, B और C मॉडल — के तहत अंजाम दिया गया।
जांच में डिस्टलरी संचालकों से कथित कमीशन वसूली, नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों में शराब बिक्री और सप्लाई जोन में हेरफेर कर अवैध वसूली जैसे आरोप सामने आए हैं। एजेंसियों का दावा है कि 40 लाख से अधिक शराब पेटियों की अवैध बिक्री के साक्ष्य भी मिले हैं।





