March 4, 2026

नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से वन अग्नि रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान

खैरागढ़ वनमंडल में 36 गांवों में चलाया जा रहा विशेष अभियान, ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी

रायपुर | 09 फरवरी 2026

वन अग्नि (दावानल) जंगलों के लिए एक गंभीर संकट बनती जा रही है। आग लगने से केवल सूखी पत्तियाँ ही नहीं जलतीं, बल्कि बीज, छोटे पौधे, झाड़ियाँ, घास और मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे जंगलों का प्राकृतिक पुनरुत्पादन प्रभावित होता है।

वन अग्नि से मिट्टी की ऊपरी परत कठोर हो जाती है, जिससे वर्षा जल जमीन में नहीं समा पाता और भू-जल स्तर में गिरावट आती है। औषधीय पौधों के नष्ट होने से वनांचलवासियों की आजीविका प्रभावित होती है। साथ ही वन्यजीवों का आवास नष्ट होने से मानव–वन्यप्राणी संघर्ष की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

इन दुष्प्रभावों को देखते हुए वनमंडल अधिकारी खैरागढ़ के निर्देशन में वन अग्नि रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत फायर लाइन की कटाई-सफाई, फायर वॉचर्स की नियुक्ति तथा आग की सूचना मिलते ही त्वरित नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।

कंट्रोल रूम की स्थापना

बेहतर प्रबंधन हेतु वनमंडल कार्यालय खैरागढ़ में फॉरेस्ट फायर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि आग की सूचना तुरंत मोबाइल नंबर 9301321797 पर दें।

गांवों में नवाचार के साथ जागरूकता

अभियान के तहत महुआ वृक्षों की ब्लेजिंग कर कंट्रोल बर्निंग, गांवों में मुनादी, दीवार लेखन, पोस्टर, स्कूलों में वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला एवं रंगोली प्रतियोगिताएं तथा सरपंचों और संयुक्त वन प्रबंधन समिति अध्यक्षों को पोस्टकार्ड भेजकर अपील की जा रही है।

नुक्कड़ नाटक से संदेश

03 फरवरी 2026 से खैरागढ़, छुईखदान, गंडई और साल्हेवारा परिक्षेत्र के 36 गांवों में नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रसिद्ध कलाकार दल ‘झंकार कला मंच’ पैलीमेटा द्वारा झांकी और प्रस्तुतियों के माध्यम से ग्रामीणों को वन अग्नि से होने वाले नुकसान और बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं।

07 फरवरी को ग्राम कानीमेरा, हाटबंजा और बुढ़ानभाठ में आयोजित कार्यक्रमों में प्रत्येक गांव से 200 से 250 ग्रामीणों की सहभागिता रही। मंच संचालक श्री प्रकाश वैष्णव ने बताया कि कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीणों को समय पर सूचना देने और आग से बचाव के लिए प्रेरित करना है।

जनसहभागिता से संरक्षण

कार्यक्रमों में वन अधिकारी एवं कर्मचारी भी ग्रामीणों से वन अग्नि रोकथाम में सहयोग की अपील कर रहे हैं। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की बैठकों में भी अग्नि सुरक्षा पर विशेष चर्चा की जा रही है, जिससे जनसहभागिता के माध्यम से वन संरक्षण को मजबूत किया जा सके।