January 17, 2026

धान खरीदी ठप: टोकन कटने के बाद भी नहीं बिक रहा धान, सैकड़ों किसान परेशान

डोकराभाठा धान उपार्जन केंद्र में लगातार तीसरे दिन धान खरीदी पूरी तरह ठप रहने से सैकड़ों किसान परेशान हैं। महीनों पहले टोकन कटवाने के बावजूद किसान ट्रैक्टर भरकर केंद्र पहुंचे, लेकिन जगह की कमी और धान उठाव न होने का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया गया।

एक ओर जिला प्रशासन धान खरीदी और भुगतान को लेकर बड़े-बड़े आंकड़े जारी कर रहा है, वहीं डोकराभाठा केंद्र की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार 6, 7 और 8 जनवरी को केंद्र में एक दाना धान की भी तौल नहीं हो सकी।

समिति अंतर्गत संचालित इस उपार्जन केंद्र की बफर क्षमता लगभग 62 हजार क्विंटल है, जबकि 15 नवंबर से अब तक यहां 66 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक सिर्फ एक ट्रक के जरिए करीब 2310 क्विंटल धान का ही परिवहन किया जा सका है। धीमी उठाव प्रक्रिया के चलते केंद्र पूरी तरह जाम हो गया है।

पहले ही दी गई थी चेतावनी

समिति प्रबंधन का कहना है कि यह समस्या अचानक नहीं आई। दिसंबर माह से ही संबंधित विभागों को पत्र लिखकर धान उठाव तेज कराने की मांग की जा रही थी। प्रतिदिन 40 से 45 टोकन जारी कर 6 से 7 हजार क्विंटल खरीदी का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन परिवहन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। मजबूरी में एक फड़ के बाद दूसरा फड़ भी जोखिम उठाकर शुरू किया गया, पर अब हालात ऐसे बन गए हैं कि आगे खरीदी संभव नहीं रह गई।

कागजों में सुचारू, हकीकत में ठप

जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों में जिले की 39 समितियों के 51 केंद्रों में लाखों मीट्रिक टन धान खरीदी और करोड़ों रुपये के भुगतान का दावा किया जा रहा है। लेकिन डोकराभाठा केंद्र की स्थिति इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

किसानों को आर्थिक नुकसान

टोकनधारी किसानों के लिए यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक नुकसान का कारण बन रही है। बार-बार खाली लौटने से परिवहन खर्च बढ़ रहा है और मौसम के कारण धान खराब होने का खतरा भी मंडरा रहा है।

समिति अध्यक्ष रामकुमार जोशी ने बताया कि जगह की कमी और परिवहन में देरी की जानकारी पहले ही विभाग को दी जा चुकी थी, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होने से आज यह संकट खड़ा हो गया। अब सवाल यह है कि प्रशासन कागजी आंकड़ों तक सीमित रहेगा या डोकराभाठा जैसे केंद्रों की जमीनी समस्याओं को गंभीरता से लेकर किसानों को राहत दिलाएगा।