Raipur | CG News: केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। छत्तीसगढ़ के लिए यह बेहद गौरवपूर्ण क्षण है कि राज्य की तीन विशिष्ट हस्तियों को पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया गया है।
समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा की समाजसेविका बुधरी ताती तथा चिकित्सा सेवा में दशकों से निःस्वार्थ कार्य कर रहे डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा। गोडबोले दंपत्ति को यह सम्मान संयुक्त रूप से प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीनों विभूतियों को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता से इन विभूतियों ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
गणतंत्र दिवस पूर्व संध्या पर मिला सम्मान
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कार सूची में छत्तीसगढ़ की इन तीनों विभूतियों का नाम शामिल होना राज्य के लिए सम्मान का विषय है। विशेष बात यह है कि ये सभी हस्तियां वर्षों से बस्तर अंचल के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेवा कार्य कर रही हैं।
👩🦰 बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताती को पद्मश्री
दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की निवासी बुधरी ताती को महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और समाजसेवा के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा।
वर्ष 1984 से लगातार वे वनांचल क्षेत्रों में नशामुक्ति, साक्षरता अभियान, सामाजिक जागरूकता और बालिका शिक्षा के लिए कार्य कर रही हैं। अब तक वे 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।
उन्होंने अपना जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और वृद्धजनों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। उनके स्नेहभाव के कारण लोग उन्हें सम्मान से ‘बड़ी दीदी’ कहकर बुलाते हैं।
🏥 दुर्गम अंचलों में निःशुल्क सेवा देने वाले गोडबोले दंपत्ति
चिकित्सा सेवा में अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री दिया जाएगा।
दोनों पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में निःशुल्क इलाज कर रहे हैं।
उन्होंने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के माध्यम से उन गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं हैं, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं। वे पैदल या सीमित संसाधनों से गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं और मरीजों का उपचार करते हैं।
🌟 छत्तीसगढ़ को मिली राष्ट्रीय पहचान
पद्मश्री सम्मान के लिए इन विभूतियों का चयन छत्तीसगढ़ की सेवा भावना, मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। यह सम्मान न केवल संबंधित व्यक्तियों के लिए, बल्कि पूरे बस्तर अंचल और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है तथा समाजसेवियों के लिए प्रेरणास्रोत भी है।





