पंडरिया। आधुनिकता और विकास के दावों के बीच छत्तीसगढ़ की बैगा जनजाति आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के कांदावानी वन परिक्षेत्र से लेकर धुरसी, पटपरिया, बीजाटोला और ठेंगाटोला जैसे दूरस्थ गांवों में आज भी जीवन संघर्षों के सहारे चल रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आया कि कई गांवों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है, और जहां सड़कें बनी भी हैं वहां निर्माण कार्य अधूरा या बदहाल स्थिति में है। ग्रामीणों का कहना है कि एक साल से सड़क निर्माण कार्य रुका हुआ है, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो गया है।
धुरसी गांव के लोगों ने बताया कि यहां पानी की गंभीर समस्या है। पानी टंकी होने के बावजूद सप्लाई नहीं हो रही, जिसके कारण ग्रामीणों को पहाड़ की तराई में स्थित झरनों से पानी लाना पड़ता है। आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी जर्जर बताई जा रही है।
ठेंगाटोला और आसपास के क्षेत्रों में गर्मी के दिनों में हॉफ नदी सूख जाती है, जिससे ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी ढोना पड़ता है। कई स्थानों पर पीएम आवास योजना के तहत निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिसका कारण पानी की कमी बताया जा रहा है।
कांदावानी और अन्य गांवों में बिजली आपूर्ति भी अस्थिर है और कई जगह सोलर सिस्टम खराब पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाएं कागजों पर तो पहुंचती हैं, लेकिन जमीन पर उनका प्रभाव सीमित है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि अंतिम छोर के गांवों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की पहुंच बहुत कम है, जिससे समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता। बैगा जनजाति के लोग सीमित संसाधनों के बावजूद अपने पारंपरिक जीवन और जंगल पर निर्भरता के साथ जीवनयापन कर रहे हैं।





