September 5, 2026

67 अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले पैरा खिलाड़ी की भावुक अपील, बोले- सम्मान और नौकरी नहीं मिली तो मेडल नीलाम कर दूंगा

रायपुर। देश के लिए 67 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके छत्तीसगढ़ के पैरा-आर्म रेसलर श्रीमंत झा ने राज्य सरकार से भावुक अपील की है। विश्व रैंकिंग में तीसरे और एशिया में नंबर-1 स्थान पर काबिज खिलाड़ी ने कहा है कि यदि इस बार भी उन्हें ‘शहीद राजीव पांडे पुरस्कार’ और सरकारी नौकरी नहीं मिली, तो वह अपने सभी 67 अंतरराष्ट्रीय पदक नीलाम कर देंगे। उनका कहना है कि नीलामी से मिली राशि से परिवार का कर्ज चुकाकर छोटा कारोबार शुरू करेंगे।

माता-पिता के संघर्ष से तय किया सफर

जन्म से दिव्यांग श्रीमंत झा ने बताया कि उनके माता-पिता ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों में भी उनके सपनों को टूटने नहीं दिया। पढ़ाई और खेल की तैयारी के लिए उनकी मां ने अपना मंगलसूत्र गिरवी रखा, जबकि पिता ने मजदूरी कर डाइट, जिम और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाया।

15 साल में जीते 67 अंतरराष्ट्रीय पदक

पिछले करीब 15 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे श्रीमंत झा अब तक 67 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। वर्तमान में वह विश्व नंबर-3 और एशिया नंबर-1 पैरा-आर्म रेसलर हैं। इसके बावजूद उनका कहना है कि उन्हें अब तक न राज्य का सर्वोच्च खेल सम्मान मिला और न ही सरकारी नौकरी।

हर साल पुरस्कार के लिए आवेदन, फिर भी नहीं मिला सम्मान

श्रीमंत का कहना है कि वह कई वर्षों से लगातार ‘शहीद राजीव पांडे पुरस्कार’ के लिए आवेदन कर रहे हैं। अपनी उपलब्धियों और मेरिट के बावजूद अब तक उन्हें यह सम्मान नहीं मिला, जिससे वह निराश हैं।

2032 पैरालंपिक में गोल्ड जीतने का सपना

उन्होंने बताया कि 2032 पैरालंपिक में पैरा-आर्म रेसलिंग को शामिल किए जाने की तैयारी चल रही है और उनका सपना भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का है। हालांकि आर्थिक तंगी और परिवार पर बढ़ते कर्ज के कारण अब यह सपना अधूरा नजर आने लगा है।

श्रीमंत ने कहा, “मैं 2032 पैरालंपिक की तैयारी कर रहा था, लेकिन अब हालात साथ नहीं दे रहे। मेरे माता-पिता ने मेरे लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। अब उनकी जिम्मेदारी मेरी है।”

सरकार से नौकरी और सम्मान की मांग

श्रीमंत झा ने राज्य सरकार से उनकी उपलब्धियों के आधार पर ‘शहीद राजीव पांडे पुरस्कार’ और सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल उनका नहीं, बल्कि उनके माता-पिता के वर्षों के त्याग और संघर्ष का सम्मान होगा।

‘न्याय नहीं मिला तो मेडल नीलाम कर दूंगा’

श्रीमंत ने कहा कि यदि इस बार भी उन्हें सम्मान और नौकरी नहीं मिली, तो वह अपने सभी 67 अंतरराष्ट्रीय पदक सरकार को सौंपकर उनकी नीलामी कर देंगे। नीलामी से प्राप्त राशि से परिवार का कर्ज चुकाकर छोटा व्यापार शुरू करेंगे और खेल को अलविदा कह देंगे।

अब इस मामले में राज्य सरकार क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।