January 16, 2026

PM Modi Celebrated Pongal: पीएम मोदी ने पोंगल मनाया, बोले– तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक

नई दिल्ली। आज यानी 14 जनवरी को देशभर में अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न त्योहार मनाए जा रहे हैं। उत्तर भारत में मकर संक्रांति की धूम है, जबकि दक्षिण भारत खासकर तमिलनाडु में पोंगल का पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पोंगल समारोह में हिस्सा लिया।

प्रधानमंत्री मोदी बुधवार सुबह केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल कार्यक्रम में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और गाय को चारा भी खिलाया।

तमिल संस्कृति सदियों को जोड़ती है : पीएम मोदी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है। यह संस्कृति सदियों को जोड़ती है और आज पोंगल एक वैश्विक पर्व बन चुका है।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर में रहने वाला तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग पोंगल को पूरे उत्साह से मनाते हैं और उन्हें स्वयं इस समुदाय का हिस्सा होने पर गर्व है।

पोंगल हमें कृतज्ञता और संतुलन सिखाता है

पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल का पर्व हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। यह धरती और सूर्य के प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे, हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे।”

प्रधानमंत्री ने किसानों की मेहनत को नमन करते हुए कहा कि पोंगल उनके परिश्रम का उत्सव है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते एक वर्ष में उन्हें तमिल संस्कृति से जुड़े कई आयोजनों में शामिल होने का अवसर मिला, जिनमें गंगईकोंड चोलपुरम के 1000 साल पुराने मंदिर में दर्शन करना एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।

क्या है पोंगल?

पोंगल तमिल संस्कृति का प्रमुख पर्व है, जो नई फसल, नई शुरुआत और नए वर्ष का प्रतीक माना जाता है। सूर्यदेव की उपासना के साथ इस त्योहार की शुरुआत होती है। इस दौरान घरों को सजाया जाता है, रंगोलियां बनाई जाती हैं और गाय-बैलों को नहलाकर सजाया जाता है।

चार दिन का पर्व, हर दिन का अलग महत्व

पोंगल चार दिवसीय पारिवारिक उत्सव है, जिसमें मनुष्य के साथ-साथ पशु-पक्षियों और खेती के औजारों की भी पूजा की जाती है।

  • भोगी पोंगल – पुराने का त्याग
  • थाई पोंगल – सूर्य उपासना
  • कन्नम पोंगल – पारिवारिक और सामाजिक मिलन
  • मट्टू पोंगल – गाय और बैलों की पूजा

यह पर्व बिहार की छठ पूजा, दिवाली और होलिका दहन जैसी परंपराओं से भी सांस्कृतिक रूप से जुड़ाव दर्शाता है।