एवियन। फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के प्रमुख नेताओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पादों से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के जरिए भारत की विविधता, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और सदियों पुरानी कारीगरी को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए उपहारों में जम्मू-कश्मीर का रामबन शहद, मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, राजस्थान की नागौरी अश्वगंधा और उत्तर प्रदेश का हाथ से बुना हुआ बनारसी सिल्क स्टोल शामिल था। ये सभी उत्पाद भारत की समृद्ध परंपराओं और स्थानीय समुदायों की पहचान माने जाते हैं।
रामबन शहद अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता और पोषण गुणों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि मेघालय की लाकाडोंग हल्दी उच्च करक्यूमिन मात्रा के कारण दुनिया भर में पहचान बना चुकी है। वहीं, नागौर की अश्वगंधा आयुर्वेदिक औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है।
इसके अलावा वाराणसी के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया बनारसी सिल्क स्टोल भारतीय हस्तकरघा कला और उत्कृष्ट कारीगरी का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया की संसद के स्पीकर रिचर्ड राई को बिहार और झारखंड की पारंपरिक मिठाई ‘ठेकुआ’ भी भेंट की, जो छठ पर्व से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
G7 शिखर सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सहित कई वैश्विक नेता शामिल हुए।
सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बैठकों को सकारात्मक और फलदायी बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक शासन, विकास और ‘ग्लोबल साउथ’ से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आयोजित विशेष सत्र में भारत की नैतिक और मानव-केंद्रित AI विकास नीति को भी दुनिया के सामने रखा।





