September 6, 2026

PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta से टकराव जारी, अब ‘सेफ हार्बर’ छिनने का खतरा; सरकार ने उठाए एल्गोरिदम पर सवाल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाए जाने के बाद Meta और भारत सरकार के बीच विवाद अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। जुलाई में पीएम मोदी का वीडियो गलती से हटने के बाद Meta ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए माफी मांगी थी और पोस्ट को बहाल कर दिया था। इसके बावजूद सरकार ने मामले को खत्म नहीं माना और Meta के अधिकारियों से इस संबंध में जवाब मांगा।

अब विवाद केवल एक पोस्ट हटाए जाने तक सीमित नहीं है। सरकार की नजर Meta के कंटेंट रिकमेंडेशन सिस्टम, एल्गोरिदम, पेड प्रमोशन और कंटेंट मॉडरेशन पर भी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद एल्गोरिदम के जरिए यह तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए और पैसे लेकर किसी कंटेंट की पहुंच बढ़ाई जाए, तो क्या उसे केवल ‘इंटरमीडियरी’ माना जा सकता है या उसकी भूमिका पब्लिशर जैसी हो जाती है।

क्या है ‘सेफ हार्बर’ और क्यों है Meta पर खतरा?

भारत के IT Act की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज को कुछ परिस्थितियों में ‘सेफ हार्बर’ यानी कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसका मतलब है कि यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को सामान्यतः सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, बशर्ते वह कानून में निर्धारित शर्तों और ड्यू-डिलिजेंस नियमों का पालन करे।

हालिया विवाद में संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने भी Meta को चेतावनी दी थी कि यदि कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो Meta के सेफ हार्बर स्टेटस पर सवाल उठाया जा सकता है।

PM मोदी की पोस्ट हटने के बाद बढ़ा विवाद

जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों से संबंधित एक वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए गायब हो गया था। Meta ने बाद में इसे गलती से हटाया गया कंटेंट बताया और कहा कि पोस्ट को बहाल कर दिया गया है। सरकार ने Meta की इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया।

इसके बाद मामला संसद की स्थायी समिति तक पहुंचा। समिति ने Meta के अधिकारियों से इस घटना के अलावा प्लेटफॉर्म पर मौजूद अन्य आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर भी सवाल किए।

Deepfake और AI कंटेंट को लेकर भी सरकार सख्त

सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि रिपोर्ट किए जाने के बावजूद AI-generated harmful content, deepfake और अन्य आपत्तिजनक सामग्री प्लेटफॉर्म पर दोबारा कैसे दिखाई देती है। सरकार की चिंता यह भी है कि AI या सिंथेटिक कंटेंट की पहचान और लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन किस स्तर तक हो रहा है।

Meta ने इन मुद्दों को गंभीर बताते हुए कंटेंट डिटेक्शन और मॉडरेशन सिस्टम को बेहतर करने की प्रतिबद्धता जताई है। Reuters के मुताबिक, कंपनी के अधिकारियों ने भारत सरकार के सामने प्लेटफॉर्म पर मौजूद हानिकारक कंटेंट और संचालन संबंधी खामियों को लेकर माफी भी मांगी है।

भारतीय भाषाओं और ह्यूमन मॉडरेशन पर जोर

सरकार की ओर से Meta को केवल ऑटोमेटेड सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय ह्यूमन ओवरसाइट बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। खासकर भारतीय भाषाओं, स्थानीय संदर्भों और सांस्कृतिक बारीकियों को समझने वाली मॉडरेशन टीमों की जरूरत पर जोर दिया गया है।

सरकार का मानना है कि केवल AI और ऑटोमेटेड फिल्टर के भरोसे आपत्तिजनक, भ्रामक या डीपफेक कंटेंट की पहचान करना पर्याप्त नहीं है।

अब आगे क्या होगा?

Meta के लिए सबसे बड़ा सवाल फिलहाल यही है कि भारत में उसे इंटरमीडियरी के तौर पर मिलने वाली कानूनी सुरक्षा कितनी मजबूत रहेगी। सरकार की जांच अब केवल पीएम मोदी की पोस्ट तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन और यूजर तक कंटेंट पहुंचाने की प्रक्रिया तक पहुंच गई है।

हालांकि, सिर्फ रिकमेंडेशन एल्गोरिदम का इस्तेमाल अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कोई प्लेटफॉर्म कानूनी रूप से ‘पब्लिशर’ बन गया है। सेफ हार्बर हटाने का सवाल अलग कानूनी और तथ्यात्मक परीक्षण पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार और Meta के बीच बातचीत जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता सामने आ सकती है।