May 19, 2026

चोट को चुनौती बनाकर पूनम ऑरन ने जीता गोल्ड, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में रचा इतिहास

रांची/खेल डेस्क। कुश्ती जैसे बेहद कठिन और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण खेल में जहां फिटनेस और ताकत सबसे अहम होती है, वहां चोटिल कंधे के साथ मैट पर उतरना किसी जोखिम से कम नहीं। लेकिन झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने इस जोखिम को अपनी ताकत बना दिया और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर इतिहास रच दिया।

चोट के बावजूद दिखाई अदम्य हिम्मत

पूनम फाइनल मुकाबले में बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं। हर मूव के साथ दर्द साफ झलक रहा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। महिलाओं के 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उन्होंने तेलंगाना की के. गीता को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया।

असाधारण जज़्बे के साथ झारखंड की पहलवान पूनम ने करियर खत्म कर देने वाली चोट से पार पाते हुए 9 साल के खिताबी सूखे को किया समाप्त

9 साल की मेहनत का मिला फल

मैच के बाद पूनम ने कहा,
“जब 9 साल से हार नहीं मानी, तो अब कैसे मान लेती। यह चोट मेरे लिए नई नहीं है। कई बार चोट लगी, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी।”

उन्होंने बताया कि करीब 6 साल पहले उनका कंधा उतर गया था, जिसके बाद भी उन्होंने लगातार संघर्ष किया और वापसी की।

संघर्षों से भरा रहा सफर

  • पूनम झारखंड के चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली हैं
  • 2017 में कुश्ती की शुरुआत की
  • शुरुआती दौर में ही गंभीर चोट से जूझना पड़ा
  • 2018-19 में SGFI में कांस्य पदक जीता
  • इसके बाद लंबे समय तक कोई बड़ा पदक नहीं मिला

इसके बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और आखिरकार गोल्ड जीतकर अपनी काबिलियत साबित की।

परिवार और कोच का मिला साथ

पूनम ने बताया कि इस प्रतियोगिता से पहले भी वह पूरी तरह फिट नहीं थीं। परिवार ने खेलने से मना किया, लेकिन कोच और सपोर्ट स्टाफ ने उनका हौसला बढ़ाया। उसी विश्वास के दम पर उन्होंने यह बड़ी जीत हासिल की।

पढ़ाई और खेल में संतुलन

पूनम सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक छात्रा भी हैं। वह रांची यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में बीए की पढ़ाई कर रही हैं और साथ ही पिछले कई वर्षों से हॉस्टल में रहकर ट्रेनिंग कर रही हैं।

अब अगला लक्ष्य जूनियर नेशनल

गोल्ड जीतने के बाद पूनम का लक्ष्य अब जूनियर नेशनल ट्रायल्स के लिए क्वालिफाई करना है। उन्होंने कहा कि वह इस सफलता को आगे भी जारी रखना चाहती हैं।


पूनम ऑरन की यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि संघर्ष, हिम्मत और जुनून की मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादा मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है।