रायपुर |
छत्तीसगढ़ में बिजली बिल बकाया को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व सभापति प्रमोद दुबे ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखते हुए मंत्री, सांसद और अधिकारियों द्वारा बिजली बिल का भुगतान नहीं किए जाने का मामला उठाया है।
प्रमोद दुबे ने अपने पत्र में कहा है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बिजली बिल लंबित रहने से छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSEB) पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। उन्होंने इसे न केवल आर्थिक नुकसान बताया, बल्कि व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला विषय भी बताया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि जब आम उपभोक्ताओं से समय पर बिजली बिल वसूला जाता है और बकाया होने पर कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई होती है, तो जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को इससे छूट मिलना अनुचित है। इससे आम जनता में गलत संदेश जाता है।
पूर्व सभापति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि
- सभी मंत्री, सांसद और अधिकारियों के बकाया बिजली बिलों की जांच कराई जाए,
- लंबित भुगतान शीघ्र वसूला जाए,
- और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं।
इस पत्र के सामने आने के बाद यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस पर क्या रुख अपनाता है और बिजली वितरण कंपनी को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





