July 29, 2026

पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय भर्ती प्रक्रिया पर विवाद, अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा मंत्री से की शिकायत

रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। अभ्यर्थियों ने राज्यपाल रमेन डेका के बाद अब उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा को ज्ञापन सौंपकर भर्ती में गड़बड़ी, पारदर्शिता की कमी और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय की कुलपति और रजिस्ट्रार की भूमिका संदिग्ध है तथा भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता देने के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की सूची में भी कई खामियां हैं।

API स्कोर सार्वजनिक नहीं करने का आरोप

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में Academic Performance Index (API) स्कोर सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं, जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से अपनाई जाती है। चयन के बाद अभ्यर्थियों को प्राप्त कुल अंकों की सूची भी जारी नहीं की जा रही, जिसे उन्होंने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।

UGC नियमों के उल्लंघन का आरोप

ज्ञापन में कहा गया है कि 3 फरवरी 2025 को एसोसिएट प्रोफेसर बायोटेक्नोलॉजी के अनुसूचित जनजाति बैकलॉग पद के साक्षात्कार में UGC नियम 10(F)(iii) का उल्लंघन किया गया। आरोप है कि केवल नियमित वेतनमान वाले अनुभव को मान्यता दी जानी चाहिए थी, लेकिन तदर्थ, संविदा और अस्थायी अनुभव को भी गिना गया।

स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की मांग

अभ्यर्थियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, भाषाई और जनजातीय विशेषताओं को स्थानीय युवा बेहतर तरीके से समझते हैं, इसलिए राज्य के योग्य युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने सभी आवेदकों के डोमिसाइल प्रमाण-पत्रों का सख्त सत्यापन करने की मांग की है।

साथ ही शॉर्टलिस्टिंग के दौरान प्रत्येक अभ्यर्थी का API स्कोर, डोमिसाइल स्थिति और अन्य मूल्यांकन मानदंड सार्वजनिक करने, साक्षात्कार से पहले दावा-आपत्ति का अवसर देने तथा अंतिम चयन के बाद सभी अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।

राजभवन से निगरानी और कार्रवाई की मांग

अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया पर राजभवन की प्रशासनिक निगरानी रखने और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की 94वीं कार्यपरिषद बैठक में चयन मानदंड स्पष्ट किए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा।

कुलपति ने आरोपों को किया खारिज

वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के लिए समिति गठित की गई है और सभी कार्य UGC के नियमों के अनुसार किए जा रहे हैं। शिकायतों के आधार पर जांच की संभावना को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि “जांच का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि भर्ती के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई है।”