रायगढ़। सार्वजनिक रूप से अश्लील गाली-गलौज और अपमानित करने के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधान आरक्षक और उसकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पुनीत समीक्षा खलखो द्वारा सुनवाई के बाद जारी किया गया है।
मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायगढ़ में पदस्थ प्रधान आरक्षक मुकेश त्रिपाठी, जो वर्तमान में रायपुर स्थित एसीबी कार्यालय में कार्यरत हैं, और उनकी पत्नी पूनम त्रिपाठी को आरोपी बनाया गया है। न्यायालय ने दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 506, 500, सहपठित धारा 511 एवं 34 के तहत प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला करीब पांच साल पुराना है। परिवादिनी मंजु अग्रवाल ने वर्ष 2020 में न्यायालय में परिवाद पत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि 3 नवंबर 2020 को वह कोतरा रोड स्थित सावित्री नगर में अपने पति को घर बुलाने गई थी। इसी दौरान मुकेश त्रिपाठी और उनकी पत्नी ने उसे अश्लील गालियां देते हुए सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी।
परिवादिनी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद मुकेश त्रिपाठी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसी दिन उसके खिलाफ सिटी कोतवाली में कई धाराओं में मामला दर्ज करा दिया और लगातार धमकियां दीं। पीड़िता द्वारा कोतवाली में शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उसे प्रताड़ित किया जाता रहा।
न्याय के लिए लगातार प्रयासरत पीड़िता ने अंततः न्यायालय की शरण ली। विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने 12 मार्च को आदेश पारित करते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। साथ ही दोनों आरोपियों को 16 अप्रैल को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
इस मामले की पैरवी अधिवक्ता सिराजुद्दीन द्वारा की गई।





