July 30, 2026

रायगढ़ में हाथियों की मृत्यु जांच पर विशेष प्रशिक्षण, 78 वन अधिकारी और पशु चिकित्सक हुए शामिल

रायपुर। छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने हाथियों की मृत्यु की वैज्ञानिक जांच और वन्यजीव अपराधों की पहचान को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायगढ़ में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रदेशभर से 78 वन अधिकारी और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए।

हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच पर जोर

“एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच की आवश्यक प्रक्रियाएं” विषय पर आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों की मौत के पीछे के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक पहचान करना और वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया गया।

बढ़ती मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 450 हाथियों की मौजूदगी है। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए विभाग ने इस पहल को महत्वपूर्ण बताया। अधिकारियों के अनुसार बीमारी, करंट, विषप्रयोग, शिकार या अन्य कारणों से होने वाली मौतों की सटीक जांच भविष्य की रणनीति तय करने में मदद करेगी।

वन्यजीव अपराधों की पहचान और साक्ष्य संरक्षण का प्रशिक्षण

विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य, व्यवहार और प्रबंधन की जानकारी दी। साथ ही वन्यजीव अपराधों की जांच, घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्य संग्रहण, हाथी दांत तस्करी से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया और फोरेंसिक साक्ष्यों के संरक्षण पर प्रशिक्षण दिया गया।

फील्ड में शव परीक्षण का व्यावहारिक अभ्यास

प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को हाथियों के शव परीक्षण, रक्त और ऊतक नमूने संग्रहण, विष विज्ञान परीक्षण और रोग जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं का फील्ड स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से जांच करने की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया।

राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव

कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों की जानकारी दी। अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक प्रियंका पांडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भागीदारी की।

वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी मजबूती

प्रशिक्षण के बाद सभी 78 प्रतिभागियों को हाथियों और अन्य वन्यजीवों की मृत्यु जांच के लिए मानकीकृत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का ज्ञान प्राप्त हुआ। इससे वन विभाग की फोरेंसिक जांच, रोग निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण और संरक्षण क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

वन मंत्री ने बताया महत्वपूर्ण कदम

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के माध्यम से हाथियों सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण प्रदेश में हाथियों के दीर्घकालिक संरक्षण और बेहतर वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।