रायपुर। सड्डू इलाके में 15 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एवं प्रथम फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (POCSO) रायपुर ने आरोपी राजू सेन उर्फ खड़ा राजू उर्फ रेमण्ड (29 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह फैसला 11 अगस्त 2026 को सुनाया।
नानी के घर से लौट रही थी पीड़िता
मामला 12 जनवरी 2026 का है। जानकारी के अनुसार, पीड़िता दोपहर करीब 1:30 बजे अपनी नानी के घर से पैदल लौट रही थी। विवेकानंद स्टेडियम के पास सेवा भारतीय मातृ छाया के नजदीक पहुंचने पर एक किशोर ने उसे फोन कर बताया कि झुमका दीदी बुला रही हैं।
इसके बाद किशोर और आरोपी एक वाहन एक्सेस क्रमांक CG-04-QR-5864 से वहां पहुंचे। जान-पहचान होने के कारण पीड़िता उनके साथ वाहन में बैठ गई। आरोप है कि उसे झुमका दीदी के घर ले जाने के बजाय आरोपी के सड्डू स्थित घर ले जाया गया।
बताया गया कि किशोर करीब 3 बजे वाहन लेकर वहां से चला गया और उस समय घर में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था।
आरोपी के घर से भागकर मां को बताई घटना
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। आरोप है कि आरोपी ने उसका मोबाइल बंद कर दिया और नशे की हालत में सो गया। मौका पाकर पीड़िता 13 जनवरी की सुबह करीब 5 बजे घर से भाग निकली और पैदल करीब 9 बजे अपने घर पहुंची।
घर पहुंचने के बाद उसने अपनी मां को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद पीड़िता की मां ने 13 जनवरी 2026 को सरस्वती नगर थाने में मौखिक रिपोर्ट दर्ज कराई।
POCSO कोर्ट में हुई सुनवाई
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं प्रथम फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ‘पॉक्सो’, रायपुर में हुई। न्यायालय की पीठासीन अधिकारी अच्छेलाल काछी थीं। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक डालेश्वर प्रसाद साहू ने पैरवी की।
अभियोग पत्र में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के साथ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) की धारा 4 के तहत आरोप शामिल किए गए थे।
20 साल के कारावास की सजा
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी राजू सेन उर्फ खड़ा राजू उर्फ रेमण्ड को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय का फैसला 11 अगस्त 2026 को जारी किया गया।





