September 4, 2026

रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में बिहार की महिला की सफल हार्ट सर्जरी, तीनों नसों में था गंभीर ब्लॉकेज

रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में बिहार के मधुबनी जिले की 48 वर्षीय महिला की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की गई। मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ट्रिपल वेसल डिजीज (TVD) कहा जाता है। इसके साथ ही मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता करीब 40 प्रतिशत थी।

विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (Beating Heart CABG) सफलतापूर्वक की। बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का इस्तेमाल किया गया। आर्टेरियल ग्राफ्ट को सामान्यतः लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला ग्राफ्ट माना जाता है।

सीने की हड्डी खोलकर की गई गोल्ड स्टैंडर्ड तकनीक से सर्जरी

मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी (Midline Sternotomy) तकनीक से की गई। इस प्रक्रिया में सीने की मध्य हड्डी यानी स्टर्नम को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। कोरोनरी बाईपास सर्जरी में यह एक स्थापित और विश्वसनीय ऑपरेटिव तकनीक है, जिसे गोल्ड स्टैंडर्ड तकनीक के रूप में जाना जाता है।

सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही। ऑपरेशन के दिन ही होश में आने के बाद मरीज ने शाम को हल्का नाश्ता किया। ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही उन्होंने चलना-फिरना शुरू कर दिया। अब मरीज की स्थिति सामान्य है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है।

मधुबनी से दरभंगा और फिर रायपुर पहुंचीं

मरीज ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले पहली बार उनके सीने में दर्द हुआ था। उन्होंने मधुबनी के एक अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लिया, लेकिन वहां हृदय रोग विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें गैस और एसिडिटी की दवाएं देकर घर भेज दिया गया।

कुछ दिनों बाद दोबारा सीने में दर्द होने पर परिजन उन्हें दरभंगा के एक बड़े अस्पताल ले गए। वहां एंजियोग्राफी कराने पर पता चला कि हृदय की तीनों प्रमुख धमनियों में ब्लॉकेज है। डॉक्टरों ने उन्हें बाईपास सर्जरी कराने की सलाह दी।

परिजन पहले पटना में सर्जरी कराने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान रायपुर में रहने वाले एक रिश्तेदार ने उन्हें अंबेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग के बारे में जानकारी दी। इसके बाद परिजन एंजियोग्राफी की सीडी लेकर रायपुर पहुंचे और डॉ. कृष्णकांत साहू से परामर्श लिया।

बिहार के आयुष्मान कार्ड से रायपुर में हुआ इलाज

डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की बाईपास सर्जरी अंबेडकर अस्पताल में संभव थी, लेकिन वह बिहार की निवासी थीं। ऐसे में यह जानकारी लेना जरूरी था कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर छत्तीसगढ़ में सर्जरी का लाभ मिल सकेगा या नहीं।

आयुष्मान योजना कार्यालय से जानकारी लेने के बाद पुष्टि हुई कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर भी मरीज की सर्जरी अंबेडकर अस्पताल में की जा सकती है। इसके बाद मरीज को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।

ब्लड शुगर 500 mg/dL से ज्यादा, पहले किया गया नियंत्रित

मरीज के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती उनका बेहद अनियंत्रित ब्लड शुगर था। अस्पताल में भर्ती होने के समय उनका ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक था। ऐसी स्थिति में तत्काल बाईपास सर्जरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता था।

चिकित्सकीय टीम ने पहले ब्लड शुगर को नियंत्रित किया और मरीज की स्थिति को सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाने के बाद ही बाईपास सर्जरी की।

कम उम्र की महिलाओं में भी बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा

डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि सामान्यतः पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) का जोखिम कम माना जाता है और महिलाओं में यह बीमारी अक्सर अधिक उम्र में सामने आती है। हालांकि, अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, तंबाकू का सेवन, पारिवारिक इतिहास, बढ़ता वजन, निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी स्थितियां महिलाओं में कम उम्र में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान या हृदय से जुड़े अन्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी बढ़ रहा भरोसा

अंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ओपन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी बाईपास सर्जरी, चेस्ट सर्जरी और विभिन्न वैस्कुलर सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। विभाग में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जटिल हृदय रोगों की सर्जरी की जा रही है।

पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि यह शासकीय चिकित्सा संस्थान के लिए गौरव की बात है कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ बिहार सहित आसपास के राज्यों से भी मरीज जटिल हृदय और ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अंबेडकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने इसे मरीजों और उनके परिजनों के बीच अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बताया।