July 23, 2026

Raipur News: आरंग के दमऊवा तालाब में संदिग्ध केमिकल से हड़कंप, पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे

आरंग। रायपुर जिले के आरंग स्थित ऐतिहासिक दमऊवा तालाब में संदिग्ध रसायनिक प्रदूषण की आशंका से नगरवासियों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। तालाब के पानी का रंग हरा और मटमैला होने के साथ सतह पर रसायन जैसी परत दिखाई देने के बाद लोगों ने मामले की शिकायत प्रशासन से की। शिकायत के बाद नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची और पानी के सैंपल लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आरंग का सबसे बड़ा झलमला तालाब पहले ही घरेलू उपयोग (निस्तारी) के लिए अनुपयोगी हो चुका है। ऐसे में नगरवासी दमऊवा तालाब पर निर्भर थे, लेकिन अब इस तालाब के भी प्रदूषित होने की आशंका से जल संकट की चिंता बढ़ गई है।

तालाब में दिखी हरे रंग की परत

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तालाब के किनारों पर हरे और मटमैले रंग की मोटी परत तैरती दिखाई दे रही है। पानी पूरी तरह दूषित नजर आ रहा है और किनारों पर कचरे का अंबार भी लगा हुआ है। स्थानीय लोगों ने तालाब के पानी का नमूना बोतल में भरकर भी इसकी खराब स्थिति दिखाई है।

मछली पालन के लिए केमिकल डालने की आशंका

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि मछली उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से तालाब में किसी प्रकार के रसायनिक पदार्थ या रासायनिक खाद का उपयोग किया गया हो। हालांकि, फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

शिकायत के बाद प्रशासन पहुंचा मौके पर

मामले की जानकारी मिलते ही आरंग नगर पालिका के सीएमओ राम संजीवन सोनवानी और इंजीनियर केशनाथ साहू निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंचे। इस दौरान वार्ड क्रमांक 2 के पार्षद उमाकांत यादव, वार्ड 3 के नरेंद्र लोधी और वार्ड 10 के संतोष लोधी भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे

सीएमओ राम संजीवन सोनवानी ने बताया कि तालाब के पानी के सैंपल एकत्र कर लिए गए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी में वास्तव में किसी रसायनिक पदार्थ की मिलावट हुई है या नहीं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मछली पालन समिति ने आरोपों से किया इनकार

मामले में मछली पालन करने वाली स्थानीय समिति के अध्यक्ष ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि समिति की ओर से तालाब में कोई रसायनिक पदार्थ डाला गया है, तो वे भविष्य में इस तालाब में मछली पालन नहीं करेंगे।

जल संरक्षण की मांग तेज

नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल जांच तक सीमित न रहकर तालाबों के संरक्षण और प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। लोगों का कहना है कि यदि दमऊवा तालाब भी अनुपयोगी हो गया तो आरंग में निस्तारी के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल पूरे मामले में सभी की नजरें लैब जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।