March 4, 2026

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश को “ऊर्जा राजधानी” बनाने की कार्ययोजना तैयार की

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश को देश की “ऊर्जा राजधानी” बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऊर्जा उत्पादन क्षमता को दोगुना करने और ट्रांसमिशन-डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने की व्यापक कार्ययोजना तैयार की है।

पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम कर नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटरिंग और ग्रिड आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है। विभागीय सचिव आईएएस डॉ. राहुल यादव ने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रदेश का भविष्य का ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया।

राज्य में वर्तमान स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 30,671 मेगावाट है। आने वाले वर्षों में 32,100 मेगावाट की नई परियोजनाओं के लिए एमओयू किए गए हैं, जिनमें थर्मल, न्यूक्लियर, सोलर और पम्प स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं। लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावित हैं, जिसमें 12,100 मेगावाट थर्मल, 4,200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2,500 मेगावाट सोलर और 13,300 मेगावाट पम्प स्टोरेज शामिल हैं। कोरबा और मड़वा में नई सुपर क्रिटिकल इकाइयों पर कार्य प्रगति पर है।

केवल ऊर्जा उत्पादन ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में भी सरकार सक्रिय है। जनवरी 2026 तक उपकेंद्रों की संख्या 137 हो गई है, पिछले दो वर्षों में 5 नए उपकेंद्र जोड़े गए। ट्रांसफॉर्मर क्षमता 24,227 MVA से बढ़कर 27,883 MVA हो गई है। 797 सर्किट किमी नई लाइनों का विस्तार किया गया और 5,200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर बिछाकर 131 उपकेंद्र जोड़े गए। अगले तीन वर्षों में 41 नए उच्च दाब उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे।

उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 65.6 लाख से अधिक हो गई है, और अधिकतम मांग 7,003 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए 11 केवी लाइनें 1.45 लाख किमी तक विस्तारित की गई हैं। वहीं, 29,379 नए 11/0.4 केवी उपकेंद्र जोड़े गए हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज के क्षेत्र में भी राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। 2027-28 तक 2,000 MWh बैटरी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने की योजना है। कोरबा में 500 MWh BESS और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। सोलर सिंचाई, सोलर पेयजल और सोलर हाईमास्ट योजनाओं के तहत हजारों इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के लिए 1.32 लाख पंजीयन हो चुके हैं। 8.30 लाख किसानों को कृषि पंपों पर सब्सिडी, 14.99 लाख बीपीएल उपभोक्ताओं को 30 यूनिट मुफ्त बिजली और मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक रियायत दी जा रही है।

राजधानी रायपुर और बिलासपुर में हजारों किमी ओवरहेड लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। रायपुर में इस योजना पर 7,600 करोड़ और बिलासपुर में 3,100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।