March 3, 2026

51 फीट की दिव्य वनवासी श्रीराम प्रतिमा ग्वालियर से रवाना, चंद्रखुरी में होगी स्थापना

रामवनगमन पथ परियोजना को मिलेगा नया आयाम

रायपुर, 21 फरवरी 2026। रायपुर से जुड़ी एक बड़ी आध्यात्मिक खबर सामने आई है। भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध माता कौशल्या धाम, चंद्रखुरी में शीघ्र ही 51 फीट ऊंची वनवासी स्वरूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह विराट प्रतिमा मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर से विधिवत रूप से रवाना हो चुकी है।

छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर इस प्रतिमा का निर्माण राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने किया है। ग्वालियर स्थित सेंड स्टोन आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में महीनों की कठिन साधना और उत्कृष्ट शिल्प कौशल से तैयार यह प्रतिमा भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।

वनवासी स्वरूप में प्रभु श्रीराम की भव्य छवि

यह 51 फीट ऊंची प्रतिमा भगवान श्रीराम के वनवासी स्वरूप को दर्शाती है। प्रतिमा में वे धनुष-बाण धारण किए हुए संयम, त्याग और मर्यादा के प्रतीक के रूप में दिखाई देंगे। शिल्पकारों ने प्रतिमा के प्रत्येक अंग-प्रत्यंग में सूक्ष्मता और आध्यात्मिक भाव को उकेरने का प्रयास किया है, जिससे यह केवल एक कलाकृति नहीं बल्कि श्रद्धा का जीवंत प्रतीक बन सके।

प्रतिमा को विशेष रूप से मजबूत और टिकाऊ ‘सेंड मिंट स्टोन’ से निर्मित किया गया है, जो अपनी मजबूती और दीर्घायु के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस पत्थर की गुणवत्ता प्रतिमा को लंबे समय तक सुरक्षित और आकर्षक बनाए रखेगी।

रामवनगमन पथ परियोजना को मिलेगा नया आयाम

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे श्रीराम वनगमन पथ परियोजना के अंतर्गत ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। इससे पहले शिवरीनारायण मंदिर और सीता रसोई जैसे स्थलों पर भी भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं।

चंद्रखुरी को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है, जहां माता कौशल्या का मायका स्थित है। यहां पहले से स्थापित प्रतिमा के स्थान पर अब यह नई विराट प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इससे यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी नई पहचान प्राप्त करेगा।

आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस भव्य प्रतिमा की स्थापना के बाद चंद्रखुरी देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाएगा। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटन आधारित गतिविधियों को गति मिलेगी और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।

आस्था, कला और विकास का संगम

51 फीट ऊंची यह प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था और शिल्प परंपरा का प्रतीक है। इसके स्थापित होते ही चंद्रखुरी आध्यात्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से उभरेगा।

प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और उन्हें विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।