रायपुर।
राजधानी रायपुर में फर्जी कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये विदेश भेजने के कथित मामले का खुलासा हुआ है। विधानसभा थाना पुलिस ने युवक की शिकायत पर उसके मौसेरे भाई सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि नौकरी का झांसा देकर युवक को कंपनी का डायरेक्टर बनाया गया और उसके नाम तथा फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर बैंक खातों से करोड़ों रुपये विदेश भेज दिए गए।
नौकरी का झांसा देकर बनाया डायरेक्टर
मेट्रोग्रीन सोसायटी, सड्डू निवासी संदीप सेठ ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2023 में बेरोजगार होने के दौरान उसके मौसेरे भाई रितेश गुप्ता और एक अन्य व्यक्ति ने उसे ठाणे (मुंबई) स्थित कांसलीवाल बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड में 50 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर डायरेक्टर की नौकरी दिलाई। कंपनी के वास्तविक कामकाज की जानकारी कभी नहीं दी गई और अधिकांश दस्तावेज घर भेजकर हस्ताक्षर कराए जाते थे।
फर्जी हस्ताक्षर कर खुलवाए बैंक खाते
शिकायत के अनुसार, बाद में आरोपी ने कई दस्तावेजों पर उसके फर्जी हस्ताक्षर किए और उसे मुंबई ले जाकर एसबीएम बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक और आरबीएल बैंक में कंपनी के खाते खुलवाए। खातों में उसे अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया, लेकिन उसकी जानकारी के बिना किसी अन्य मोबाइल नंबर को बैंक खातों से लिंक कर दिया गया, जिससे खाते में होने वाले लेनदेन की जानकारी उसे नहीं मिल सकी।
ईडी की कार्रवाई के बाद हुआ खुलासा
एफआईआर के मुताबिक, 22 अप्रैल 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर स्थित शिकायतकर्ता के घर पर छापा मारा। पूछताछ के दौरान उसे पहली बार जानकारी मिली कि जिस कंपनी में वह डायरेक्टर था, उसके बैंक खातों से करोड़ों रुपये विदेश भेजे गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसकी पहचान और दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसे पूरे मामले में फंसाने की साजिश रची गई।
धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज
शिकायत के आधार पर विधानसभा थाना पुलिस ने आरोपी रितेश गुप्ता और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ईडी और बैंक रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब ईडी से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों का रिकॉर्ड और सभी वित्तीय लेनदेन का विवरण जुटा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि विदेश भेजी गई रकम का स्रोत क्या था, इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल थे और शिकायतकर्ता की भूमिका वास्तविक थी या उसे फर्जी डायरेक्टर बनाकर इस्तेमाल किया गया। शुरुआती जांच में मामले को शेल कंपनियों के माध्यम से किए गए संदिग्ध विदेशी वित्तीय लेनदेन से जोड़कर देखा जा रहा है।





