प्रदेश में अब तक निशुल्क जारी होने वाली फायर एनओसी प्रक्रिया अब निजी कंपनियों के माध्यम से की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत 10 रुपए प्रति वर्गफीट शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य संस्थानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।
नई प्रक्रिया और शुल्क:
मौजूदा व्यवस्था में जिला कमांडेंट की टीम द्वारा निरीक्षण के बाद फायर एनओसी निशुल्क जारी होती थी। अब निजी एजेंसियों को फायर ऑडिट का जिम्मा सौंपा गया है और 10 रुपए प्रति वर्गफीट तक शुल्क लिया जा रहा है। उदाहरण के लिए, 50 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल वाले किसी अस्पताल को सालाना करीब 5 लाख रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं।
संस्थान और असर:
सरगुजा जिले में 18 निजी अस्पताल, 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 193 उप स्वास्थ्य केंद्र, 2365 स्कूल और 15 कॉलेज पर यह अतिरिक्त खर्च पड़ेगा। ओजस हॉस्पिटल के संचालक डॉ. नवीन द्विवेदी ने बताया कि 10 रुपए वर्गफीट के हिसाब से शुल्क ज्यादा होने के कारण उन्होंने ऑडिट नहीं कराया। बिलासपुर की एक कंपनी ने राजधानी के हॉस्पिटल को 70,800 रुपए का बिल थमाया, जिसमें 10,800 रुपए जीएसटी शामिल था।
सरकारी प्रतिक्रिया:
गृह विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने बताया कि पहले एनओसी निशुल्क थी, इसलिए सरकार को कोई आय नहीं होती थी। अब कंपनियां यह काम करेंगी, जिससे सरकार को फीस का हिस्सा मिलेगा। उन्होंने कहा कि समय-समय पर मॉनिटरिंग होगी और एजेंसी मनमानी करेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
एनओसी मिलने के बाद यदि फायर सेफ्टी में कमी रही तो हादसे की जिम्मेदारी किसकी होगी? सचिव ने कहा कि कंपनियों का काम केवल ऑडिट करना है, निरीक्षण और मॉनिटरिंग समय-समय पर सुनिश्चित की जाएगी।





