रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई और भंडारण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक Vikas Upadhyay ने हमर अस्पताल गुढ़ियारी में दवाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में करोड़ों रुपये की दवाओं का स्टॉक डंप कर रखा गया है, जबकि मरीजों को जरूरत की दवाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं।

विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि अस्पताल में बड़ी मात्रा में ऐसी दवाएं रखी गई हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट बेहद करीब है। कुछ दवाएं एक्सपायर होने की स्थिति में हैं, जबकि कुछ कथित तौर पर एक्सपायर होने के बाद भी अस्पताल परिसर में पड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि एक्सपायरी दवाओं को कूड़े की तरह रखा गया है और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
पूर्व विधायक ने दवा सप्लाई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। जिन दवाओं की मांग कम है उनकी अधिक सप्लाई की जा रही है, जबकि जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। उन्होंने कहा कि बीपी, शुगर, गर्भावस्था और नवजात शिशुओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण दवाएं एक्सपायरी के करीब हैं।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल में रखी कुछ दवाओं की एक्सपायरी डेट अगले कुछ महीनों में समाप्त होने वाली है। इनमें एंटासिड दवा अगस्त 2026, सांस संबंधी दवा इथोफायलीन और थियोफाईलीन जून 2026, बीसीजी वैक्सीन इंजेक्शन अगस्त 2026, लेबेटाल टैबलेट जून 2026, बायोकार्ड प्रेगनेंसी टेस्ट किट मई 2026 और आयरन फोलिक एसिड मई 2026 तक एक्सपायर होने वाली बताई जा रही हैं। वहीं इनालाप्रिल, ईजी पील और सेट्रेजीन सिरप जैसी कुछ दवाओं के एक्सपायर होने का भी दावा किया गया है।
मामले में हमर अस्पताल गुढ़ियारी के प्रभारी अधीक्षक Prem Ratre ने कहा कि अस्पताल से 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाएं भेजी जाती हैं। एक्सपायरी दवाओं को वापस मंगाकर अलग काउंटर में रखा जाता है और इसकी लिखित जानकारी भी दी जाती है। उन्होंने कहा कि जिन दवाओं की एक्सपायरी नजदीक है, उनका उपयोग नियमानुसार किया जा सकता है।





