September 4, 2026

रायपुर में 23 अगस्त को निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा, 10 हजार श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद

रायपुर। राजधानी रायपुर में विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में 23 अगस्त को विशाल कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। गुढ़ियारी से शुरू होकर यात्रा हटकेश्वरनाथ महादेव मंदिर तक पहुंचेगी। यात्रा में करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

कांवड़ यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों से धार्मिक और सांस्कृतिक दल पहुंचकर अपनी प्रस्तुतियां देंगे। यात्रा में बोल बम के जयघोष के साथ शिवभक्ति और भारतीय संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा।

CM साय और रमन सिंह भी होंगे शामिल

कांवड़ यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित प्रदेश सरकार के मंत्री और रायपुर के विधायक शामिल होंगे।

देशभर के कलाकार दिखाएंगे सांस्कृतिक रंग

यात्रा में उत्तर प्रदेश की महाकाल-अघोरी और महाकाली टीम, दिल्ली की महाकाल अघोरी टीम, केरल का भारत नाट्यम, उज्जैन की डमरू महाकाल सवारी और महाराष्ट्र का प्रसिद्ध नागपुर ढोल आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

इसके अलावा खड़गपुर की मां काली टीम और ओडिशा के पारंपरिक दल भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर और कोरबा की अघोरी टीम, बेंद्री के लोक कलाकार, दुर्ग-भिलाई के धुमाल दल, रायपुर की राधा रानी धुमाल और महाकाल-अघोरी टीम भी शामिल होगी।

धार्मिक झांकियां रहेंगी आकर्षण का केंद्र

कांवड़ यात्रा में शिव परिवार, राम-सीता, हनुमान वानर सेना, बाहुबली हनुमान, भगवान परशुराम, जामवंत, भगवान गणेश, सुग्रीव, भोलेबाबा और महाकाल की झांकियां शामिल होंगी।

इसके साथ राम-सीता दरबार, शिव परिवार, 11 घोड़े, दो बग्घियां, लाइव सिंगिंग और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां भी यात्रा की भव्यता बढ़ाएंगी।

‘आस्था, संस्कृति और सामूहिक श्रद्धा का विराट उत्सव’

विधायक राजेश मूणत ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में रायपुर की जनता और शिवभक्तों ने कांवड़ यात्रा को जिस आत्मीयता से अपनाया है, उससे यह आयोजन एक बड़े धार्मिक जनउत्सव का रूप ले चुका है।

उन्होंने कहा कि कांवड़ उठाना केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा, साधना और समर्पण की अभिव्यक्ति है। इस बार भी यात्रा में आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।

यात्रा के भव्य आयोजन के साथ रूट, यातायात डायवर्जन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रशासन की तैयारियां स्पष्ट होना जरूरी है।