July 30, 2026

रायपुर | खारुन नदी की 30 किमी यात्रा में सामने आई तस्वीर: खनन, अतिक्रमण और सिकुड़ते तटों की हकीकत

रायपुर। तरीघाट (पाटन) से महादेव घाट (रायपुर) तक खारुन नदी पर की गई करीब 30 किलोमीटर की यात्रा में नदी की बदलती और कई जगहों पर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। यह यात्रा तरीघाट से शुरू होकर महादेव घाट तक की गई, जिसमें नदी के कई हिस्सों में अतिक्रमण और खनन की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।

रिपोर्ट के अनुसार, परसुलीडीह से लमकेनी तक पहुंचते-पहुंचते नदी की चौड़ाई कम होती जाती है और कई स्थानों पर किनारों पर तार घेराबंदी और निजी कब्जे नजर आते हैं। लमकेनी क्षेत्र में नदी तक पहुंचने के लिए खेतों और घेरों को पार करना पड़ता है, जिससे तट तक सामान्य पहुंच भी सीमित हो गई है।

ढोंडरा और खट्टी के बीच के हिस्सों में रेत और मुरुम के बड़े पैमाने पर खनन के कारण नदी तटों का स्वरूप बदल गया है। कई जगहों पर नदी का पाट चौड़ा दिखाई देता है, लेकिन यह प्राकृतिक नहीं बल्कि खनन के प्रभाव से हुआ बदलाव बताया जा रहा है। इसी हिस्से में कुछ फार्म हाउस और रिसॉर्ट भी नदी के किनारे तक पहुंच बनाते दिखाई देते हैं।

टोला घाट से आमदी तक कुछ स्थानों पर तटीय रास्ता मौजूद है, लेकिन उसके बाद कई जगहों पर यह फिर से समाप्त हो जाता है। आमदी क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति देखी गई, जहां दोनों किनारों पर कुछ दूरी तक पैदल चलने योग्य रास्ता मिलता है।

आगे मोडरा-जमराव से लेकर दतरेंगा, काठाडीह और खुड़मुड़ा तक नदी के दोनों किनारों पर खेत, बाड़ी और निर्माण कार्यों के कारण तटीय पहुंच सीमित हो जाती है। कई स्थानों पर नदी किनारे चलने की जगह भी बेहद कम हो गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि खारुन नदी के इस पूरे हिस्से में कहीं पचरी निर्माण, कहीं अतिक्रमण और कहीं खनन के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ है। स्थानीय स्तर पर लगातार हो रहे हस्तक्षेप के चलते नदी के किनारे सार्वजनिक उपयोग की जगह भी कम होती जा रही है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि नदी को बचाने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। साथ ही अवैध खनन और अतिक्रमण पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता बताई गई है, ताकि खारुन नदी अपने प्राकृतिक स्वरूप को फिर से प्राप्त कर सके।