May 17, 2026

रायपुर: “नन्हे कदम, सशक्त भारत” – आंगनबाड़ी केंद्रों का राष्ट्रीय रूपांतरण शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार का समन्वित मॉडल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल बच्चों के पोषण और देखभाल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक चेतना और ग्रामीण रोजगार का समन्वित केंद्र बन चुके हैं। महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जिलों में शुरू हुए इन नवाचारों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरक मॉडल के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

भवन ही शिक्षक: BALA मॉडल
मनरेगा और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से निर्मित आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार कर दिया है। 11.69 लाख रुपए की लागत से बने प्रत्येक भवन में दीवारें, फर्श और खुली जगहें शिक्षण माध्यम के रूप में विकसित की गई हैं। बच्चों को खेल-खेल में वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, जीव-जंतु और सामान्य ज्ञान सिखाया जा रहा है।

धमतरी का बाला मॉडल
धमतरी जिले में 81 BALA आधारित आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए, जिनमें से 51 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना में निर्मित केंद्र में दृश्य-आधारित शिक्षण से पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे सहज रूप से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। दीवारों और फर्श पर गणितीय अवधारणाएँ, भाषा चार्ट और रंग-आकार की संरचनाएं बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ा रही हैं।

रोजगार और ग्रामीण आजीविका
मनरेगा के अंतर्गत इन भवनों के निर्माण से ग्रामीण श्रमिकों को स्थायी रोजगार मिला और परिवारों की आय में वृद्धि हुई। आंगनबाड़ी निर्माण केवल बाल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का मॉडल भी बन गया है।

खेल-खेल में शिक्षा और सामाजिक चेतना
रंग-बिरंगी दीवारें, शैक्षणिक चार्ट और खेल सामग्री बच्चों को भाषा, गणित और व्यवहारिक ज्ञान सीखने के लिए प्रेरित कर रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्र अब गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुके हैं।

कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाएं आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं।

स्वच्छता, सुरक्षा और सामुदायिक सहभागिता
आरओ जल व्यवस्था, स्वच्छ रसोई, खेलघर और पर्याप्त खेल सामग्री से आंगनबाड़ी केंद्र सुरक्षित और बाल-अनुकूल बने हैं। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की निरंतरता में वृद्धि हुई है।

राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर
इन आंगनबाड़ी केंद्रों का रूपांतरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को साकार कर रहा है। आज ये केंद्र बच्चों की पहली पाठशाला बन चुके हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।