September 4, 2026

रायपुर में खुले नाले ने ली 5 साल के काव्यांश की जान: शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

रायपुर। अम्लीडीह में खुले नाले में गिरने से 5 वर्षीय काव्यांश की मौत ने रायपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाले की स्थिति को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते उसे सुरक्षित नहीं किया गया। हादसे के बाद पीड़ित परिवार में मातम है, वहीं स्थानीय लोगों और विपक्ष ने नगर निगम की लापरवाही को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

शिकायतों के बावजूद खुला रहा नाला

स्थानीय लोगों का दावा है कि अम्लीडीह क्षेत्र में नाले का काम अधूरा पड़ा था और उसका एक हिस्सा खुला हुआ था। खुले नाले के कारण इलाके में पहले से खतरा बना हुआ था। लोगों के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारियों तक इसकी शिकायत भी पहुंचाई गई थी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।

इसी बीच खेलते समय 5 वर्षीय काव्यांश खुले नाले में गिर गया। रेस्क्यू के बाद बच्चे को बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद इलाके में लोगों का आक्रोश बढ़ गया है।

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने लगाए लापरवाही के आरोप

घटना की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने बच्चे की मौत पर संवेदना व्यक्त करते हुए इसे महज हादसा मानने से इनकार किया।

तिवारी ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों द्वारा खुले नाले को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद उसे सुरक्षित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती और नाले को ढक दिया जाता तो संभवत: इस हादसे को टाला जा सकता था।

15 दिन में सभी खुले नाले ढकने की मांग

आकाश तिवारी ने नगर निगम और जिला प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने पूरे मामले की तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और शहर की सभी खुली नालियों को 15 दिनों के भीतर सुरक्षित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि शहर के कई हिस्सों में खुले नाले और गड्ढे लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले से मौजूद खतरनाक स्थानों को चिन्हित कर कार्रवाई करनी चाहिए।

हीरापुर-जरवाए और अस्पताल हादसे का भी जिक्र

तिवारी ने राजधानी में हाल में सामने आए अन्य हादसों का भी जिक्र किया। उन्होंने हीरापुर-जरवाए में मकान के गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत और रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में दो सफाई कर्मचारियों की मौत का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही घटनाएं शहर की व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती हैं। उनके मुताबिक, कहीं खराब ड्रेनेज व्यवस्था बीमारी का कारण बन रही है तो कहीं खुले नाले और गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं।

महापौर ने माना- खुले नाले से समस्या

हादसे को लेकर महापौर मीनल चौबे ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर बच्चे का शव बाहर निकाला।

महापौर ने माना कि खुले नाले की वजह से समस्या हो रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि नालियों को पूरी तरह ढकने से सफाई में परेशानी और जाम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि निगम इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने पर विचार करेगा।

मुआवजे को लेकर अलग-अलग बयान

हादसे के बाद पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठी है। महापौर मीनल चौबे ने कहा कि नगर निगम की ओर से मुआवजा दिया जा सकता है या नहीं, इसकी जानकारी लेकर अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।

वहीं नगर निगम कमिश्नर संबित मिश्रा ने कहा कि नगर निगम में मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है। उनके मुताबिक, मुआवजा राजस्व विभाग के माध्यम से दिया जाता है। उन्होंने मामले की जांच की बात कही और कहा कि शिकायत प्रतिवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्मार्ट सिटी के दावों के बीच बुनियादी सुरक्षा पर सवाल

रायपुर में स्मार्ट सिटी के तहत करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर काम हो रहा है। आधुनिक सड़कें, स्मार्ट लाइटिंग और दूसरी सुविधाओं को शहर के विकास की तस्वीर के तौर पर पेश किया जाता है। लेकिन दूसरी ओर कई इलाकों में खुले नाले, अधूरे ड्रेनेज सिस्टम और खतरनाक गड्ढे अब भी लोगों की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं।

अम्लीडीह की घटना ने इसी विरोधाभास को सामने ला दिया है। सवाल यह है कि जब शहर के विकास पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है, तो लोगों की बुनियादी सुरक्षा से जुड़े खुले नालों को समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया जा रहा?

अभिभावकों की बढ़ी चिंता

घटना के बाद स्थानीय अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। माता-पिता को डर है कि घर के आसपास मौजूद खुले नाले और गड्ढे बच्चों के लिए कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। बरसात के दौरान पानी भर जाने से ऐसे स्थानों का खतरा और बढ़ जाता है।

काव्यांश की मौत ने नगर निगम और प्रशासन के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कार्रवाई हमेशा हादसे के बाद ही होगी, या खतरनाक स्थानों को पहले से चिन्हित कर सुरक्षित किया जाएगा?

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि मामले की जांच के बाद जिम्मेदारी तय होती है या नहीं और शहर के खुले नालों को सुरक्षित करने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।