May 18, 2026

Rajiv Gandhi Shiksha Mission Scam : कंप्यूटर खरीदी में 4.72 करोड़ का घोटाला, EOW/ACB ने कोर्ट में पेश किया चालान

रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) रायपुर ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर उपकरणों की खरीदी में हुए करोड़ों के घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ब्यूरो ने इस मामले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया है।

यह मामला वर्ष 2010-11 और 2011-12 के दौरान कंप्यूटर उपकरणों की खरीदी से जुड़ा है। इस मामले में ब्यूरो ने अपराध क्रमांक 38/16 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120 (बी) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। विस्तृत जांच के बाद सोमवार 16 मार्च को विशेष न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया गया।

स्कूलों के लिए खरीदे जाने थे कंप्यूटर उपकरण
जांच में सामने आया कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर समर्थित योजना में राज्य के उस समय के 18 जिलों की शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं को एलएफडी/टीएफटी कंप्यूटर युक्त उपकरण उपलब्ध कराए जाने थे। इसके लिए दो चरणों में कुल 638 एलएफडी/टीएफटी मॉनिटर की मांग की गई थी। इनमें वर्ष 2010-11 में 246 और वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर शामिल थे।

फर्जी ऑथराइजेशन लेटर से किया घोटाला
मामले में मिनी इंफोटेक रायपुर के संचालक आलोक कुशवाहा ने वर्ष 2010-11 में 246 मॉनिटर की आपूर्ति की, जबकि ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन रायपुर ने वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर सप्लाई किए। जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने एचपी और एग्माटेल कंपनियों के फर्जी और कूटरचित ऑथराइजेशन लेटर तैयार कर शासन को गुमराह किया।

मॉनिटर की कीमतों में भारी गड़बड़ी
जांच में यह भी सामने आया कि जिन मॉनिटरों का बाजार मूल्य लगभग 57,950 रुपए प्रति नग था, उन्हें शासन को 1,26,500 रुपए प्रति नग की दर से सप्लाई किया गया। इस तरह फर्जी दस्तावेजों और मिलीभगत के जरिए शासन को कुल 4 करोड़ 72 लाख 88 हजार 462 रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।

विवेचना के बाद ईओडब्ल्यू/एसीबी ने आरोपी आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है। वहीं मामले से जुड़े शासकीय अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को अनुशंसा भी भेजी गई है।