खैरागढ़ | छत्तीसगढ़
कला और संगीत की नगरी खैरागढ़ में स्थित प्रसिद्ध इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित 17वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन की ऐतिहासिक घोषणा की।
अब यह प्रतिष्ठित संस्थान “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़” के नाम से जाना जाएगा।
इतिहास और भावनात्मक विरासत को सम्मान
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि यह नाम परिवर्तन संस्थान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक मूल्यों को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने बताया कि संगीत प्रेमी राजकुमारी इंदिरा सिंह के असामयिक निधन के बाद खैरागढ़ के तत्कालीन राजा ने अपनी पुत्री की स्मृति में राजमहल दान कर विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
राज्यपाल ने भरोसा दिलाया कि नाम परिवर्तन से जुड़ी सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी की जाएंगी।
उपलब्धियों का उत्सव: विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
गरिमामय दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया—
- स्वर्ण पदक (Gold Medal): 232 विद्यार्थी
- रजत पदक (Silver Medal): 4 विद्यार्थी
- डी.लिट (D.Litt): 5 शोधार्थी
- पीएचडी (PhD): 64 शोधार्थी
एशिया का अनोखा कला विश्वविद्यालय
खैरागढ़ का यह विश्वविद्यालय भारत ही नहीं, बल्कि एशिया का पहला कला और संगीत विश्वविद्यालय माना जाता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और चित्रकला के क्षेत्र में इस संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है।
समारोह में गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं—
- उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा
- धरसीवा विधायक एवं पद्मश्री अनुज शर्मा
- खैरागढ़ राजपरिवार के महाराज आर्यव्रत सिंह
- कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चन्द्रवाल
यह विश्वविद्यालय एक पिता के अपनी पुत्री के प्रति प्रेम और कला के प्रति समर्पण का जीवंत प्रतीक है। राजमहल को शिक्षा के मंदिर में बदलने की यह अनूठी विरासत अब राजकुमारी इंदिरा सिंह के पूरे नाम के साथ वैश्विक पहचान प्राप्त करेगी।





