राजनांदगांव। जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना की रफ्तार बेहद धीमी है। योजना शुरू होने के तीन साल बाद भी जिले के हजारों ग्रामीणों को नल से जल की सुविधा नहीं मिल सकी है। कई गांवों में पानी की टंकियां अधूरी हैं, तो कहीं पाइपलाइन बिछने के बावजूद कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। ठेकेदारों द्वारा काम बीच में छोड़ देने से परियोजना प्रभावित हुई है और ग्रामीणों को अब भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में शुरू हुई इस योजना के तहत जिले के 1 लाख 56 हजार 789 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। अब तक 1 लाख 40 हजार 491 घरों में ही कनेक्शन दिए जा सके हैं, जबकि 16 हजार 298 घर अभी भी योजना के लाभ से वंचित हैं।
जिले के 662 गांवों में योजना के तहत कार्य होना था, लेकिन इनमें से 180 गांवों में अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। कहीं पानी की टंकियों का निर्माण अधूरा है तो कहीं पाइपलाइन बिछाने का काम लंबित है। राजनांदगांव विकासखंड में 107 पानी टंकियों का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन अब तक केवल 77 टंकियां ही बन पाई हैं।
भुगतान रुका, ठेकेदारों ने छोड़ा काम
पीएचई विभाग के अनुसार निर्माण एजेंसियों को भुगतान नहीं होने के कारण कई ठेकेदारों ने काम अधूरा छोड़ दिया है। विभाग का कहना है कि अधूरे कार्यों को जल्द पूरा कराने के लिए एजेंसियों को निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर काम की रफ्तार अब भी धीमी बनी हुई है।
70 से अधिक ठेकेदारों के लाइसेंस निलंबित
निर्माण कार्यों में अनियमितता और मूल्यांकन में गड़बड़ी सामने आने के बाद पीएचई विभाग ने 70 से अधिक ठेकेदारों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। भुगतान रुकने से कई स्थानों पर पाइपलाइन तो बिछ गई है, लेकिन उन्हें पानी की टंकियों से नहीं जोड़ा गया है। इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
ग्राम पंचायतों को नहीं सौंपा गया संचालन
जल जीवन मिशन के तहत निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपी जानी है, लेकिन जिले की 800 से अधिक ग्राम पंचायतों में अब तक एक भी पंचायत को योजना का औपचारिक हैंडओवर नहीं किया गया है। कई गांवों में पानी की सप्लाई शुरू होने के बावजूद संचालन की जिम्मेदारी अब भी विभाग के पास ही है। इससे योजना के प्रभावी संचालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।





