राजनांदगांव। शहर में डेढ़ दर्जन से अधिक स्थानों पर महापुरुषों और शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन नियमित रखरखाव के अभाव में इनमें से कई प्रतिमाएं बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं। नगर निगम के बजट में हर साल इनके रखरखाव के लिए राशि का प्रावधान होने के बावजूद प्रतिमाओं की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
देखरेख के अभाव में धूल खा रहीं प्रतिमाएं
नगर निगम और जिला प्रशासन ने महापुरुषों की स्मृतियों को संजोने और लोगों को उनके जीवन से प्रेरणा देने के उद्देश्य से शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और वार्डों में प्रतिमाएं स्थापित की हैं। लेकिन नियमित सफाई और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं होने से कई प्रतिमाएं धूल से ढकी हुई हैं।
यहां तक कि नगर निगम परिसर में स्थापित प्रतिमाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं है। कुछ स्थानों पर प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि कई जगह आसपास का सौंदर्यीकरण भी बदहाल नजर आ रहा है।
जयंती और पुण्यतिथि पर ही होती है सफाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश प्रतिमाओं की सफाई केवल महापुरुषों की जयंती या पुण्यतिथि के मौके पर की जाती है। इसके बाद लंबे समय तक इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता।
पीडब्ल्यूडी के एमआईसी प्रभारी सावंत वर्मा ने कहा कि प्रतिमाओं की देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम की है और इसके लिए बजट में प्रावधान भी किया जाता है।
कई प्रमुख प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त
शहर के नंदई चौक में छत्तीसगढ़ की परंपरा को दर्शाने वाली प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा भी टूट-फूट की स्थिति में है।
कलेक्टोरेट मार्ग पर हाईवे किनारे ठाकुर प्यारेलाल स्कूल की प्रतिमा के आसपास की टाइल्स निकल रही हैं। महारानी स्कूल के सामने पंथी नृत्य करती टीम की प्रतिमाएं भी धूल से ढकी हुई हैं।
इसके अलावा नंदई चौक, कुआं चौक, पोस्ट ऑफिस चौक, हॉट बाजार, ओवरब्रिज, कक्कड़ ऑटो के पास अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा, कमला कॉलेज रोड पर दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा और दिल्ली दरवाजा के पास सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा समेत कई स्थानों पर रखरखाव की जरूरत है।
शहर की संस्कृति से जुड़ी हैं प्रतिमाएं
महापुरुषों की ये प्रतिमाएं सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि शहर की संस्कृति और इतिहास को भी दर्शाती हैं। ऐसे में इनके नियमित रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की भी है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कई प्रतिमाएं पूरी तरह जर्जर और खंडित हो सकती हैं।
प्रतिमाओं की मौजूदा बदहाली के बीच सुधार तभी संभव है, जब नगर निगम हर प्रतिमा के लिए नियमित सफाई, सुरक्षा और मरम्मत की जिम्मेदारी तय करे और उसकी सार्वजनिक निगरानी हो।





