March 5, 2026

रायपुर के मरवाही क्षेत्र में दुर्लभ हनी बैजर जोड़ा देखा गया, वन विभाग ने सुरक्षित जंगल में छोड़ा

रायपुर। मरवाही वनमंडल के उसाड़ गांव क्षेत्र में हाल ही में दुर्लभ वन्यजीव हनी बैजर का जोड़ा देखा गया है। ग्रामीणों द्वारा मोबाइल फोन से ली गई फोटो और वीडियो से इसकी पुष्टि हुई, जिससे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना हुआ है। यह घटना दर्शाती है कि मरवाही क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र अब पहले से अधिक सुदृढ़ हो रहा है।

वन विभाग की टीम को जैसे ही हनी बैजर की उपस्थिति की जानकारी मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए हनी बैजर के जोड़े को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर रवाना किया। इस दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं हुई। वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र में निगरानी और अधिक मजबूत कर दी है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा बनी रहे।

वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के पास न जाएं और न ही उन्हें परेशान करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी वन्यजीव के दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित किया जाना चाहिए।

हनी बैजर छोटे आकार का होने के बावजूद अत्यंत बहादुर और आक्रामक माना जाता है। यह अपने से कई गुना बड़े जानवरों का सामना करने में भी पीछे नहीं हटता। शेर, लकड़बग्घे और यहां तक कि ज़हरीले साँप भी इसकी दृढ़ता और जीवन रक्षा कौशल के कारण इससे दूर रहते हैं। भारत में हनी बैजर बहुत ही सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है और इसे दुर्लभ प्रजातियों में शामिल किया जाता है। इसका नाम इसके शहद खाने की आदत से पड़ा है, क्योंकि यह मधुमक्खियों के छत्तों से शहद निकालकर खाने में माहिर होता है।

वन मंत्री केदार कश्यप और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडे के मार्गदर्शन में प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ये प्रयास अब साफ तौर पर परिणाम दिखा रहे हैं, और इसी कारण दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास मिल पा रहा है। राज्य शासन वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता मानता है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण मिल सके।

हनी बैजर का मरवाही क्षेत्र में दिखाई देना न केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलताओं को दर्शाता है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के सुदृढ़ होने का भी संकेत है। वन विभाग इस क्षेत्र में सतत निगरानी बनाए रखेगा और जनता से भी सहयोग की उम्मीद रखता है, ताकि दुर्लभ वन्यजीव सुरक्षित रह सकें।