नई दिल्ली। केंद्र सरकार को अगले वित्तीय वर्ष में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSU Banks) से करीब 3.16 लाख करोड़ रुपये के डिविडेंड मिलने की उम्मीद है। इस बात का संकेत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट 2026 के भाषण के दौरान दिया।
यह अनुमान चालू वित्तीय वर्ष में RBI से मिले 2.68 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड डिविडेंड से भी ज्यादा है।
सरकार की आय का अहम स्रोत है RBI डिविडेंड
भारतीय रिजर्व बैंक सरकार के लिए फंड मैनेजमेंट का काम करता है। इन फंड्स से होने वाली आय का एक हिस्सा हर साल डिविडेंड के रूप में केंद्र सरकार को ट्रांसफर किया जाता है।
चालू वित्तीय वर्ष में RBI से मिले भारी डिविडेंड ने सरकार को फिस्कल डेफिसिट काबू में रखने में अहम भूमिका निभाई है, जबकि नाममात्र की आर्थिक वृद्धि धीमी रही और रेवेन्यू खर्च बढ़ा।
मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान
मनीकंट्रोल के एक पोल के मुताबिक, जिसमें अर्थशास्त्री, ट्रेजरी हेड और मार्केट एक्सपर्ट शामिल थे,
- बजट 2026 में सरकार को RBI और PSU बैंकों से 2 से 3 लाख करोड़ रुपये के डिविडेंड की उम्मीद जताई गई थी।
यह अनुमान पिछले बजट में लगाए गए 2.56 लाख करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है।
डिविडेंड बढ़ने की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार,
- पब्लिक सेक्टर बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट
- करेंसी मार्केट में बढ़ी अस्थिरता
- रुपये को संभालने के लिए RBI द्वारा डॉलर की भारी बिक्री
इन सभी वजहों से RBI की अतिरिक्त आय बढ़ी है, जिससे डिविडेंड में उछाल देखने को मिला।
कब मिलता है RBI का डिविडेंड?
- पब्लिक सेक्टर बैंक सालाना नतीजे जारी करने के बाद डिविडेंड घोषित करते हैं।
- RBI आमतौर पर मई महीने में सरकार को डिविडेंड ट्रांसफर करता है।
- मई 2025 में RBI ने सरकार को रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था, जो फॉरेक्स ऑपरेशंस से हुई अधिक कमाई की वजह से संभव हुआ।





