रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खेल सुविधाओं की बदहाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। खारुन नदी में महादेव घाट के पास बने गहरे एनीकट में बच्चों को जान जोखिम में डालकर तैराकी की प्रैक्टिस कराते हुए तस्वीरें सामने आई हैं, जो सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती हैं।
यह वही स्थान है जिसे पहले ही संवेदनशील और खतरनाक क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। बावजूद इसके यहां खुलेआम बच्चों की तैराकी प्रैक्टिस कराई जा रही है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, फिर भी लापरवाही जारी
महादेव घाट स्थित इस एनीकट के पास ही नगर निगम का फिल्टर प्लांट मौजूद है। पूर्व में यहां नहाने आए नागरिकों के डूबने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों को देखते हुए नगर निगम द्वारा चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां बच्चों को नदी में उतारा जा रहा है।
दरअसल, ट्राइबल गेम्स की प्रतियोगिता चल रही है और ओपन स्विमिंग प्रतियोगिता अगले महीने प्रस्तावित है। प्रतियोगिता सिर पर होने के कारण खिलाड़ी मजबूरी में इस खतरनाक जगह पर अभ्यास कर रहे हैं।
स्विमिंग पूल बंद, मजबूरी में नदी में अभ्यास
जिन नगर निगम के स्विमिंग पूल में बच्चे नियमित अभ्यास करते थे, वह मेंटेनेंस के चलते बंद कर दिया गया है। ऐसे में खिलाड़ी और कोच के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उन्हें खारुन नदी में अभ्यास के लिए उतरना पड़ा।
अनहोनी की जिम्मेदारी पर कोच चुप
कोच प्रमोद फरिकार का कहना है कि स्विमिंग पूल मरम्मत के कारण बंद है और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता नजदीक होने की वजह से बच्चों को नदी में लाना पड़ा। हालांकि, गहरे पानी में किसी अनहोनी की जिम्मेदारी को लेकर वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। उनका सिर्फ इतना कहना था कि बच्चे तैराकी में दक्ष हैं और अभ्यास के दौरान पैरेंट्स भी मौजूद रहते हैं।
बच्चों और पैरेंट्स बोले – डर लगता है, लेकिन मजबूरी है
नदी में अभ्यास कर रहे बच्चों और उनके अभिभावकों ने हालात को बेहद खतरनाक बताया। पैरेंट्स का कहना है कि स्विमिंग पूल और नदी में जमीन-आसमान का फर्क है। नदी का बहाव तेज है, सांस जल्दी फूलती है, पानी गंदा है और कई जगहों पर नुकीले पत्थर, फिसलन और मछली पकड़ने के जाल मौजूद हैं।
अभ्यास कर रहे बच्चों ने साफ कहा,
“डर लगता है, लेकिन मजबूरी है।”
माता-पिता का कहना है कि राजधानी रायपुर में बच्चों को नदी में अभ्यास करना पड़ रहा है, यह बेहद शर्मनाक स्थिति है। स्विमिंग पूल बंद होने से बच्चों की जान जोखिम में है, इसलिए वे खुद भी मजबूरी में नदी तक आने को मजबूर हैं।
मेंटेनेंस में देरी, रोजाना 700 बच्चे प्रभावित
स्विमिंग पूल कर्मचारियों के अनुसार 22 दिसंबर से मेंटेनेंस कार्य चल रहा है, लेकिन पिछले 5 दिनों से ठेकेदार साइट पर मौजूद नहीं है। टाइल्स, पाइप फिटिंग, सफाई और पानी की शुद्धता जैसे कई जरूरी काम अभी बाकी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि काम सही ढंग से हुआ तो कम से कम एक महीने का समय और लगेगा।
इस स्विमिंग पूल पर रोजाना 500 से 700 बच्चे निर्भर हैं, जो अब अभ्यास से वंचित हो गए हैं।
महापौर का बयान – जल्द पूरा होगा मेंटेनेंस
मामले पर महापौर मीनल चौबे ने कहा कि यह स्विमिंग पूल बच्चों के लिए ही है और वे वहीं अभ्यास करें।
उन्होंने कहा, “थोड़ा मेंटेनेंस का काम है, जो जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।”
बड़ा सवाल – जिम्मेदारी किसकी?
राजधानी में खिलाड़ियों को सुरक्षित खेल सुविधाएं मुहैया कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन जिस तरह खतरनाक एनीकट में बच्चों की जान जोखिम में डालकर अभ्यास कराया जा रहा है, वह सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है। अब सवाल यह है कि यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?





