May 14, 2026

ईरान-इज़राइल तनाव के बीच रूस का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर रोक

नई दिल्ली/मॉस्को:
रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है। उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

रूस के अनुसार, यह कदम घरेलू सप्लाई को बनाए रखने और ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए उठाया गया है। इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

रूस प्रतिदिन लगभग 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल का निर्यात करता है, इसलिए इस फैसले का असर चीन, तुर्किये, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो रूसी तेल उत्पादों के बड़े खरीदार हैं।

भारत पर असर सीमित
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत पर इस फैसले का सीधा असर कम रहेगा, क्योंकि भारत पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन के बजाय कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का आयात करता है। देश अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें करीब 20% रूस से आता है।

भारत के पास बड़ा रिफाइनरी नेटवर्क है, जो रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करता है। यही कारण है कि देश अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ तैयार ईंधन का निर्यात भी करता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस फैसले से वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। पहले से ही युद्ध के चलते तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं।

पहले भी लगा चुका है बैन
रूस इससे पहले भी घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए पेट्रोल-डीजल निर्यात पर रोक लगा चुका है। पिछले साल यूक्रेन से जुड़े हमलों के कारण रिफाइनरियों पर असर पड़ा था, जिसके चलते यह कदम उठाया गया था।

रूसी तेल पर प्रीमियम
वर्तमान स्थिति में वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने से रूसी तेल की मांग बढ़ी है। भारत ने अप्रैल डिलीवरी के लिए रूस से करीब 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है। जो तेल पहले डिस्काउंट पर मिलता था, अब वह ब्रेंट क्रूड से 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल महंगे दाम पर खरीदा जा रहा है।

यह बढ़ती मांग और सप्लाई की कमी का संकेत है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।