July 30, 2026

साय कैबिनेट के बड़े फैसले: 125 दिन रोजगार गारंटी, अटल आजीविका समृद्धि हाट और CBG नीति को मंजूरी

Raipur News Update : रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित महानदी भवन मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में ग्रामीण रोजगार, आजीविका संवर्धन और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में नई योजनाओं और नीतियों को मंजूरी देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी

कैबिनेट ने “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़” के प्रारूप को मंजूरी दी। भारत सरकार के अधिनियम 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।

योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण, आजीविका परिसंपत्तियों के विकास और टिकाऊ रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाएगा। इसके साथ ही ग्राम पंचायत आधारित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और पीएम गति शक्ति योजना से समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा।

योजना में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 60:40 रहेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ योजना को हरी झंडी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना शुरू करने का फैसला लिया।

योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई, सिलाई और हस्तशिल्प), प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल और डेयरी), सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत और डिजिटल केंद्र), विपणन केंद्र और आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

इस योजना के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।

कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026 को मंजूरी

कैबिनेट ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप को भी मंजूरी प्रदान की। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) में परिवर्तित किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और जैव उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन CBG उत्पादन की संभावना जताई गई है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है।